शहरवासियों को वीपीएचओ कार्यालय में जाकर पंजीकरण करवाना होगा। इसके बाद निगम एक टोकन जारी करेगा जिससे कुत्ते की पहचान हो सकेगी। भविष्य में इस टोकन में चिप लगाने की भी योजना है ताकि कुत्ते के मालिक की पूरी जानकारी तुरंत मिल सके।
सदन के दौरान उपमहापौर राकेश शर्मा ने कहा कि पंजीकरण शुल्क बेहद कम है। इसे बढ़ाया जाना चाहिए। इस पर बाकी पार्षदों की सहमति के बाद शुल्क 200 रुपये कर दिया गया। इस दौरान पार्षद आनंद कौशल ने आवारा कुत्तों के आतंक का भी मामला उठाया।