नगर योजना संशोधन अध्यादेश को नगर निगम शिमला ने सिरे से नकार दिया है।
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अवैध भवनों को नियमित करने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से लाए गए नगर योजना संशोधन अध्यादेश को नगर निगम शिमला ने सिरे से नकार दिया है। मंगलवार को स्पेशल हाउस के दौरान मेयर, डिप्टी मेयर सहित नगर निगम के पार्षदों ने अध्यादेश को शिमला के लोगों के लिए घातक करार दिया।
हाउस के दौरान सर्वसम्मति से नगर योजना संशोधन अध्यादेश को निरस्त करने का प्रस्ताव पास किया गया। इस प्रस्ताव को अब नगर निगम प्रदेश सरकार को भेजेगा। हाउस के दौरान पार्षदों ने अध्यादेश की खामियां गिनाई और सुधार के लिए सुझाव भी दिए।
नगर निगम ने सवाल उठाया है कि ‘एज इज वेयर इज’ की तर्ज पर भवनों को नियमित करने का आश्वासन दिया गया था लेकिन अध्यादेश में इसे जटिल बना दिया गया है। निगम का आरोप है कि मौजूदा अध्यादेश से न तो ओल्ड शिमला (अंग्रेजों के जमाने में बसा शहर) के लोगों को फायदा मिलेगा और न तो मर्ज एरिया (1997 के बाद जोड़ा गया इलाका) के लोगों को लाभ मिलेगा।
निगम महापौर संजय चौहान ने कहा कि मौजूदा अध्यादेश शहर के अधिकतर लोगों के लिए बेकार है। सेट बैक को लेकर व्यवस्था बेहद कड़ी है। एमसी और टीसीपी एक्ट में अवैध निर्माण को लेकर कड़े प्रावधान होने के बावजूद अध्यादेश में बिजली पानी काटने और निर्माण तोड़ने की व्यवस्था करने का क्या मतलब है।
15 जून के बाद हुआ अवैध निर्माण नहीं होगा नियमित
मेयर ने मौजूदा अध्यादेश को निरस्त कर बदलावों के साथ नया अध्यादेश लाने की मांग उठाई है।
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मेयर ने मौजूदा अध्यादेश को निरस्त कर बदलावों के साथ नया अध्यादेश लाने की मांग उठाई है। नगर निगम ने सरकार से मौजूदा अध्यादेश में बदलाव कर इसे शहर के लोगों के लिए सरल बनाने, औपचारिकताएं घटाने और फीस की दरें कम करने की मांग उठाई है।
स्पेशल हाउस की अध्यक्षता निगम महापौर संजय चौहान ने की। उप महापौर टिकेंद्र पंवर, आयुक्त पंकज राय, निगम पार्षद और अधिकारी हाउस के दौरान उपस्थित रहे। शहरी विकास विभाग की ओर से टाउन प्लानर अंजली शर्मा और वेब पोर्टल डिजाइनर ऋषि हाउस में उपस्थित हुए।
स्पेशल हाउस में नगर निगम के सीनियर एपी राजीव शर्मा ने प्रेजेंटेशन के दौरान अवैध भवनों को नियमित करने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से लाए गए नगर योजना संशोधन अध्यादेश के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अध्यादेश का मकसद अवैध निर्माण रोकना और पूराने मामले नियमित करना है।
शिमला ही नहीं यह अध्यादेश पूरे प्रदेश के लिए लाया गया है। अध्यादेश के तहत इस माह 29 जुलाई तक आवेदन लिए जाएंगे। 14 जून 2017 तक मामले निपटा लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि 15 जून के बाद हुआ अवैध निर्माण इस अध्यादेश के तहत नियमित नहीं होगा। निगम कमिश्नर को आवेदनों की जांच के बाद फैसला लेने के लिए अधिकृत किया गया है।
मर्ज एरिया के लिए अलग प्रावधान करे सरकार : टिकेंद्र
नगर निगम के स्पेशल हाउस को संबोधित करते हुए उपमहापौर टिकेंद्र सिंह पंवर ने कहा कि नगर योजना संशोधन अध्यादेश में खामियों के कारण लोग अप्लाई करने से हिचक रहे हैं। ओल्ड शिमला और मर्ज एरिया के लोगों को इस अध्यादेश का कोई लाभ नहीं हुआ है।
मर्ज एरिया में जहां लोगों ने गांव की सड़क के किनारे मकान बनाए थे अब वहां नेशनल हाइवे बन गया है। लोग अब अपने मकानों के लिए एनएच आथारिटी से एनओसी कैसे लेकर आएं। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को 10 साल तक टीसीपी ने कोई नोटिस जारी नहीं किया, लेकिन अब लोगों को पेंच में फंसा दिया गया है।
उन्हाेंने कहा कि मर्ज एरिया के लिए सरकार को अलग प्रावधान करने चाहिए थे, क्योंकि 1997 से पहले स्थिति अलग थी। अधिकतर लोगों ने बिना सेट बैक छोड़े मकान बनाए अब लोग सेट बैक कैसे दिखाएंगे।
पुराने शिमला में भी लोग मालिकाना हक न मिलने के कारण इस अध्यादेश का लाभ नहीं उठा सकते। मकानों का नक्शा तो दूर लोग मालिकाना हक को लेकर भी अभी तक संशय में है। डिप्टी मेयर ने लोगों को लाभान्वित करने के लिए अध्यादेश में संशोधन की मांग उठाई।