नगर निगम की मासिक बैठक में शहर से जुडे़ कई बड़े फैसले लिए गए हैं। एमसी ने शहरवासियों के तीन महीने के पानी के बिल माफ कर दिए हैं। नगर निगम हाउस में पीलिया प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के लिए नवंबर, दिसंबर और जनवरी माह का पानी का बिल माफ करने का निर्णय लिया गया है। छोटा शिमला वार्ड से निगम पार्षद सुरेंद्र चौहान की मांग पर निगम प्रशासन ने यह फैसला लिया।
पीलिया प्रभावित क्षेत्रों विकासनगर, छोटा शिमला, बीसीएस, खलीनी, न्यू शिमला, कुसुम्पटी और पंथाघाटी के करीब 12 हजार उपभोक्ताओं को तीन माह के पानी के बिल जारी नहीं होंगे। हालांकि नगर निगम ने इस मुद्दे पर कानूनी सलाह लेने का विकल्प अभी खुला रखा है।
वर्ष 2007 में दूषित पाया गया था खड्ड का पानी
वर्ष 2007 में जनवरी से मार्च माह के बीच राजधानी में पीलिया फैला था। उस समय राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान पुणे की टीम ने पीलिया प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रिपोर्ट तैयार की थी। नगर निगम के उपमहापौर टिकेंद्र पंवर ने इस टीम की जांच रिपोर्ट के आधार पर तैयार रिसर्च पेपर को (2008 में प्रकाशित) बुधवार को हाउस के समक्ष रखा।
उन्होंने बताया कि 87 ब्लड सैंपल, 3 पानी के सैंपल और दो सीवेज सैंपल की रिपोर्ट के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई। जांच के दौरान पीलिया के सभी मामले अश्वनी खड्ड के पानी की सप्लाई वाले क्षेत्रों से ही दर्ज किए गए। उन्होंने बताया कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का पानी मिलने से अश्वनी खड्ड का पानी दूषित हुआ।
डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर ने बताया कि आठ साल पहले मल्याणा स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को अश्वनी खड्ड परियोजना से नीचे शिफ्ट करने का सुझाव दिया था लेकिन इस पर अमल नहीं किया गया। इसके अतिरिक्त सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की मशीनरी के आधुनिकीकरण का भी सुझाव दिया गया लेकिन इस पर भी ध्यान नहीं दिया गया। टिकेंद्र ने कहा कि यदि नगर निगम अश्वनी खड्ड के पानी की शहर के लिए सप्लाई पर स्थायी प्रतिबंध लगा दे तो भविष्य में शहर में पीलिया नहीं फैलेगा।