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क्या शिमला नगर निगम की ये बातें जानते हैं आप?

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एक सितंबर को नगर निगम शिमला को अस्तित्व में आए 44 साल पूरे हो गए। संयोग से इसी मौके पर टाउन हाल नाम की इस ऐतिहासिक इमारत को नया जीवन प्रदान किया जाएगा। 164 साल पुरानी इस धरोहर को एशियन डेवलेपमेंट बैंक के सहयोग से पर्यटन विभाग सहेजेगा।
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एक सितंबर 1970 को प्रदेश सरकार ने शिमला नगर पालिका का स्टेटस बदलकर नगर निगम किया था। 1968 के एक्ट के बाद प्रदेश एमसी एक्ट 1979 बना। इसकी स्वीकृति राष्ट्रपति से 22 अगस्त 1980 को मिली। 1986 तक नगर निगम के चुनाव नहीं हुए। इस अवधि के दौरान पांच अलग-अलग प्रशासक इसके प्रमुख रहे। सोमवार को नगर निगम 45वें साल में प्रवेश करेगा।

बीते 44 साल में नगर निगम ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। एक जमाने में मुंबई नगर पालिका को उधार देने वाले नगर निगम शिमला की आर्थिक स्थिति अब बहुत कमजोर हो गई है। कर्मचारियों को तनख्वाह देने तक के नगर निगम को लाले पड़ गए हैं। धन की कमी के कारण इस ऐतिहासिक भवन को भी नजरअंदाज किया गया जबकि यह इमारत शिमला की शान है।
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1851 में बनी थी नगर पालिका शिमला

दिसंबर 1851 में पहली बार शिमला में नगर पालिका बनी थी। 26 अगस्त 1855 में पहली बार नगर पालिका के चुनाव हुए। इससे पूर्व पदेन सदस्य हुआ करते थे। शिमला नगर पालिका तत्कालीन पंजाब की पहली नगर पालिका थी। 31 जुलाई 1871 में शिमला प्रथम श्रेणी नगर पालिका गठित हुई।

26 जून 1969 को अनंत पाल (भारतीय प्रशासनिक सेवा) को नगर पालिका का प्रशासक नियुक्त किया गया। इनके बाद आरके आनंद, सीएम चतुर्वेदी, अतर सिंह और एसएस सिद्धू प्रशासक के पद पर कार्यरत रहे।

14 मई 1986 को नगर निगम शिमला के पहली बार चुनाव हुए। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने शहर को 21 वार्डों में बांटकर चुनाव करवाए। दो जून 1986 को नव निर्वाचित नगर निगम का गठन हुआ था।
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संजय चौहान बने पहले निर्वाचित महापौर

2012 में सरकार ने नगर निगम के महापौर और उप महापौर के चुनाव प्रत्यक्ष तरीके से करवाने का फैसला लिया। पहली बार हुए प्रत्यक्ष चुनाव में माकपा के संजय चौहान ने महापौर और टिकेंद्र पंवर ने उप महापौर के पद पर जीत दर्ज की। यह प्रत्यक्ष चुनाव पहली और आखिरी बार हुए हैं। राज्य सरकार ने अब प्रत्यक्ष चुनाव पर रोक लगा दी है।

मई 1997 में तीसरी बार तृतीय सदन के लिए 25 वार्डों में चुनाव हुए। शहर से सटे 59 गांवों और पूर्व नगर पंचायत ढली को नगर निगम में शामिल किया गया। 25 वार्डों में से आठ वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए।

टाउन हाल बिल्डिंग का जीर्णोद्धार सितंबर में शुरू होगा। 164 साल पुरानी इस धरोहर को एशियन डेवलेपमेंट बैंक के सहयोग से पर्यटन विभाग सहेजेगा। जीर्णोद्धार के चलते नगर निगम दफ्तर को पुराने कोर्ट कांप्लेक्स भवन में शिफ्ट किया जाना है। सितंबर के पहले सप्ताह में दफ्तर को शिफ्ट करने का काम शुरू होगा।
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