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खजाना खाली होने से अटक गए करोड़ों के काम, मंत्री से मांगा पैसा

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सरकार से ग्रांट न मिलने एमसी की परेशानी बढ़ी
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150 से ज्यादा निर्माण कार्यों की फाइलें रोकी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। नगर निगम शिमला का खजाना खाली हो चुका है। हालांकि बीते माह 224 करोड़ रुपये का बजट एमसी ने पेश किया था। चुनावी साल में पैसा खत्म होने से निगम प्रशासन ने नए कार्यों की फाइलें रोक दी हैं। इसमें जिन कार्यों के टेंडर अवार्ड हो चुके थे उनका काम शुरू करने पर भी रोक लगानी पड़ी है।
हालत यह है कि शहरवासियों को सुविधा देने वाले 150 से ज्यादा कार्यों की फाइलें रुक चुकी हैं। इसमें जो काम हो चुके हैं, उनका भुगतान करने के लिए नगर निगम को फंड जुटाना पड़ रहा है। इस वित्तीय वर्ष में केंद्र और राज्य सरकार से एमसी को ग्रांट नहीं मिली है। नगर निगम को उम्मीद थी कि केंद्र सरकार से हर साल की तरह इस बार भी करीब 30 करोड़ रुपये की सालाना ग्रांट मिलेगी। इसी उम्मीद में निगम ने 20 करोड़ रुपये से अधिक के कार्यों के टेंडर कॉल कर दिए। साल बीतने के बाद भी ग्रांट नहीं आई।
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राज्य सरकार ने भी आर्थिक मदद नहीं दी। अब पार्षदों ने निर्माण कार्यों को लेकर जो प्रस्ताव लगाए हैं, उनके लिए पैसा नहीं बचा है। इन कामों के लिए निगम को करीब पांच करोड़ रुपये से अधिक पैसा चाहिए जो अभी कहीं से मिलता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में निगम प्रशासन ने नए कार्यों पर ब्रेक लगा दी है।
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सरकार से पैसा मांगे मेयर-डिप्टी मेयर : पार्षद
भाजपा पार्षद संजीव ठाकुर ने कहा कि उनकी आधा दर्जन फाइलें अटकी हैं। निगम पैसा न होने की बात कहकर काम शुरू नहीं कर रहा। मेयर और डिप्टी मेयर दफ्तर में बैठकर टाइम पास कर रहे हैं। इन्हें सरकार के पास जाकर ग्रांट मांगनी चाहिए। पूर्व मेयर कुसुम सदरेट ने कहा कि निगम को बजट दिलाने के लिए मेयर-डिप्टी मेयर को प्रयास करने चाहिए। कहा कि उनकी भी कई फाइलें अटकी हैं। कांग्रेस पार्षद सिमी नंदा, इंजनघर से भाजपा पार्षद आरती चौहान ने भी काम अटकने को लेकर सवाल उठाए हैं। इन पार्षदों का कहना है कि टेंडर होने के बाद भी निगम ठेकेदार को काम अवार्ड नहीं कर रहा।
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