सीटू के अखिल भारतीय आह्वान पर गुरुवार को प्रदेश में कई जगह मजदूरों ने प्रदर्शन किया। राजधानी शिमला के उपायुक्त कार्यालय के बाहर राज्य स्तरीय प्रदर्शन हुआ। सीटू प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा और महासचिव प्रेम गौतम ने कहा कि श्रम कानूनों को खत्म कर बनाई गई मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं के खिलाफ, न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपये घोषित करने, आंगनबाड़ी, मिड डे मील और आशा वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी घोषित करने और हरियाणा की तर्ज पर वेतन देने, फिक्स टर्म, ठेका, पार्ट टाइम, टेंपरेरी और कांट्रेक्ट रोजगार पर अंकुश लगाने, आठ के बजाए बारह घंटे ड्यूटी करने के खिलाफ, कोरोना काल में हुई करोड़ों मजदूरों की छंटनी, कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली, भारी बेरोजगारी, हर आयकर मुक्त परिवार को 7500 रुपये की आर्थिक मदद, हर व्यक्ति को दस किलो राशन की सुविधा, मजदूरों के वेतन में कटौती, ईपीएफ और ईएसआई की राशि में कटौती, किसान विरोधी तीन कानूनों और बिजली विधेयक 2020 के मुद्दे पर हिमाचल प्रदेश के मजदूर सड़कों पर उतरे।