हर सरकार की तरह ही इस सरकार ने भी सत्ता में आने से पहले ही हिमाचल के हर व्यक्ति को शुद्ध पेयजल मुहैया करने का वायदा किया। इसके लिए कारगर योजना बनाने की बातें कीं। राजधानी शिमला समेत कई शहरों में तो चौबीसों घंटे पीने का पानी उपलब्ध करवाने के आश्वासन दिए, मगर गर्मियां आते ही इस सरकार की चुस्ती की भी पोल खुल गई है।
शिमला शहर के कई इलाकों में चौथे दिन भी पानी नहीं मिल रहा है। प्रदेश भर में सरकार की 1022 पेयजल स्कीमें आंशिक, आधी या पूरी तरह से सूख चुकी हैं। एक सप्ताह पहले ही ये आंकड़ा 964 योजनाओं का था। यानी एक हफ्ते में ही 58 और स्कीमों पर सूखे का असर पड़ा है। आने वाले दिनों में ये संख्या बढ़ सकती है।
वक्त रहते पेयजल स्रोतों को रिचार्च न करने से अब लोग त्राहिमाम कर रहे हैं। नदी-नालों में चैकडैम बनाकर इन्हें रिचार्च किया जा सकता था। राजधानी छोड़िए, राज्य के दूरदराज गांवों में भी लोग पीने के पानी के लिए तरस गए हैं। कई क्षेत्रों में तो लोग किलोमीटरों दूर से पेयजल का प्रबंध करने को मजबूर हैं। गांवों में लोगों के मवेशी भी प्यासे मर रहे हैं।
राज्य सरकार ने पानी की शिकायतों के लिए एक टोल फ्री नंबर 18001808009 बेशक जारी किया है, मगर इस पर ज्यादातर लोगों की कॉल नहीं हो पा रही है। ये या तो लगातार व्यस्त चल रहा होता है या इस पर कॉल ही नहीं लग पा रही है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि इस पर खूब फोन आ रहे हैं और लोग पानी मांग रहे हैं।
सरकार ने सिंचाई पर रोक लगाई, टुल्लू पंप कब्जाए- राज्य सरकार ने पेयजल संकट से निपटने के लिए सिंचाई पर रोक लगा दी है। जिन लोगों ने भी सरकारी स्रोतों से अपने लिए पानी के पंप लगा रखे हैं। उन्हें तुरंत प्रभाव से बंद करने को कह दिया है।
जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक सिंचाई पर रोक रहेगी। आईपीएच महकमे ने तो कई जगहों से टुल्लू पंपों और अन्य अवैध सामग्री को भी कब्जे में ले लिया है, जिससे पानी का किफायती इस्तेमाल हो।
हिमाचल में सरकार का वाटर मैनेजमेंट प्लान लागू नहीं हो पाया है। सत्ता में आने से पहले सरकार ने अपने स्वर्णिम दृष्टिपत्र में ये प्लान बनाने का वायदा किया था। मगर अब तक ये प्लान बन ही नहीं पाया है।
ढाबों में खाना सस्ता, पानी महंगा- ढाबों में खाना सस्ता है, जबकि पानी महंगा है। पानी की एक बोतल को पच्चीस से तीस रुपये तक बेचा जा रहा है। अगर किसी ने दो बोतलें पानी खरीदनी हो तो उसका खाना सस्ता और पीने का पानी महंगा होगा। शिमला के बहुचर्चित काफी हाउस समेत तमाम रेस्तरां में लोगों को बोतलबंद पानी ही दिया जा रहा है। हर जगह पेयजल के लिए हायतौबा मचा हुआ है।
दो महीने में लगाए 774 नए हैंडपंप, ये भी नाकाफी- सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य महकमे के कार्यवाहक प्रमुख अभियंता सुमन विक्रांत का कहना है कि विभाग ने दो महीने में 774 हैंडपंप लगाए हैं। हैंडपंप लगाने का सिलसिला जारी है। सिंचाई का पानी पीने को इस्तेमाल करने को कहा गया है।
उन्होंने माना कि राज्य में कुल 9,516 पेयजल योजनाओं में से 1022 स्कीमें प्रभावित चल रही हैं। ये प्राकृतिक आपदा है। इस बार बारिशें ही कम हुई हैं। इसी से ये नुकसान हुआ है। हमने सभी आईपीएच कर्मचारियों की छुट्टियां पहले से ही बंद करके रखी हैं। लोगों से अपील है कि वे पानी की बचत करें।
भीषण गर्मी के चलते हिमाचल के 54 में से 30 शहरी निकायों में पानी के लिए हाहाकार मची हुई है। राजधानी शिमला, ठियोग, कुफरी, जिला मंडी के सुंदरनगर, मंडी, करसोग, तत्तापानी, जिला बिलासपुर के शहरी क्षेत्र, घुमारवीं, जिला सिरमौर, जिला हमीरपुर और ऊना जिले में पानी की विकराल स्थिति हो गई है।
जिला सिरमौर में पानी की किल्लत के चलते लोग खच्चरों पर पानी ढोने को मजबूर हैं। टैंकरों से पानी की आपूर्ति करने के सरकार के निर्देश से वीआईपी एरिया और होटलों को राहत मिली है, लेकिन आम लोगों को टैंकरों से आने वाले पानी के लिए भी तरसना पड़ रहा है।
प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में पेयजल सप्लाई देने वाले जलाशय (लिफ्ट स्कीमों) में जलस्तर निचले स्तर पर पहुंच गया है। शहरी निकायों में 24 घंटे पानी देने का दावे फेल हो गए हैं। राजधानी समेत कुछ हिस्सों में एक सप्ताह बाद पानी की सप्लाई हो रही है।
भूजल में गिरावट से सैकड़ों हैंडपंपों से सप्लाई भी कई हिस्सों में प्रभावित है। राजधानी शिमला में 10 रुपये 15 लीटर पानी बिक रहा है। आईपीएच इंजीनियर इन चीफ अनिल बाहरी ने कहा कि व्यवस्था को दुरुस्त किया जा रहा है।
जनता का सामना नहीं कर पा रहे कर्मचारी- पानी की किल्लत के चलते लोगों में भारी गुस्सा है। अफसर और कर्मचारियों को जनता का सामना करना मुश्किल हो रहा है। कीमैन और फिटर लोगों के बीच में खड़े नहीं हो पा रहे हैं।