राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बलग की प्रधानाचार्य पराग शर्मा ने कहा कि दो बच्चे आंशिक 12वीं और मुस्कान दसवीं में उनके पास ही पढ़ते थे। बदले व्यवहार के कारण वे वार्षिक परीक्षाएं नहीं दे पाए। इनमें आए बदलाव से चिंतित इनके परिजन हमसे मिले। हमने चेकअप करवाने की सलाह दी। दोनों का बड़ा भाई भी पहले इसी स्कूल का विद्यार्थी था।
बच्चों में हिस्टीरिया, लोग अकेला छोड़ें : डॉ. शर्मा
आईजीएमसी शिमला के मनोचिकित्सा विज्ञान के प्रमुख चिकित्सक और राज्य के जाने-माने मनोवैज्ञानिक डॉ. रविचंद्र शर्मा का कहना है कि यह अंधविश्वास है। बच्चों में यह महज मनोविकार है। ऐसे लोग अचेतन में कुंठा का समाधान ढूंढने को ऐसा करते हैं।
वे जानबूझकर ऐसा नहीं करते। अचेतन मन यह सब करवाता है कि कोई खुद को देवी मान लेता है तो कोई देवता। जितना लोग वहां जाएंगे, उतना ही अंधविश्वास बढ़ता जाएगा। समाज शास्त्री मोहन झारटा ने भी इसे अंधविश्वास बताया है।
दवाएं खाना छोड़ीं, फिर शुरू कीं
ठियोग क्षेत्र के माहोरी गांव के पंकज कुमार का कहना है कि उनके एक रिश्तेदार को ब्लड कैंसर है। उन्होंने बलग जाकर ब्लड कैंसर की दवाएं छोड़ दीं। पीजीआई में इलाज चल रहा है। डॉक्टरों ने जब उनको चेताया कि ऐसा करने से जान भी जा सकती है। तब जाकर दोबारा से दवा खानी शुरू की।
बलग स्थानीय निवासी सुरेश कुमार शर्मा कहते हैं कि यह सब सौ फीसदी झूठ है। बच्चों के पीछे कुछ लोग हो सकते हैं। जो इनसे स्थानीय देव समाज पर भी टीका-टिप्पणी करवा रहे हैं। प्रशासन इसमें हस्तक्षेप करे।
तीन चौकियों के जवान लगा दिए, नहीं मान रहे लोग : एसडीएम
शिमला। एसडीएम ठियोग मोहन दत्त शर्मा ने कहा कि भीड़ को ज्यादा देखते हुए हमें फागू, देहा और छैला पुलिस चौकियों से बलग में पुलिसकर्मी तैनात करने पड़ रहे हैं। प्रशासन से तहसीलदार, डीएसपी समेत कई अधिकारी मौके पर भेजे जा चुके हैं। भीड़ में कोई नुकसान न हो, इसका ध्यान रखा गया है।
अब तो बच्चे भी लोगोें को यहां न आने की सलाह दे रहे हैं, मगर लोग मान नहीं रहे हैं। लोगों से आग्रह है कि वे अंधविश्वास छोड़ें। किसी ने बच्चों के बारे में अफवाह फैलाई। उसी के बाद ये सब गड़बड़ हुआ है। हमारे पास किसी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं भी नहीं आई। तभी प्रशासन कुछ कर सकता है।