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पढ़ाई छोड़ खुद को भगवान का अवतार मान रहे तीन बच्चे, देखने वालों का लगा तांता

Mon, 02 Apr 2018 09:56 PM IST
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला के ठियोग के बलग गांव में अजीबोगरीब स्थिति बन गई है। पढ़ाई छोड़ तीन बच्चे खुद को भगवान शिव, काली माता और विष्णु का अवतार मान रहे हैं। कच्ची झोपड़ी में इन बच्चों के कथित प्रवचन के वीडियो वायरल होने से अब इनसे मिलने वालों का तांता लग गया है।

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हिमाचल, पंजाब और हरियाणा से रोजाना गाडि़यां पहुंच रही हैं। हैरत की बात है कि कैंसर, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों से ग्रस्त कई मरीजों ने इन बच्चों के कहने पर दवाइयों का सेवन छोड़ दिया है। अब तो आलम ये है कि भीड़ संभालने के लिए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। डॉक्टरों ने बच्चों को हिस्टीरिया से ग्रस्त बताया है। साथ ही बच्चों को भीड़ से अलग रखने की सलाह दी है। 

दरअसल, इन बच्चों के वीडियो तेजी से वायरल हुए हैं। इनमें बच्चे खुद को भगवान का अवतार बताकर उपदेश देते नजर आते हैं, लेकिन अंधविश्वास के चलते बच्चों को उपचार दिलाने में पहल करने के बजाय लोगों की भीड़ प्रवचन सुनने आ रही है। मनोवैज्ञानिक, समाज शास्त्री और चिकित्सक इसे अंधविश्वास का मामला बता रहे हैं।

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स्कूल से कटे बच्चों के नाम, चेकअप की सलाह दी

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बलग की प्रधानाचार्य पराग शर्मा ने कहा कि दो बच्चे आंशिक 12वीं और मुस्कान दसवीं में उनके पास ही पढ़ते थे। बदले व्यवहार के कारण वे वार्षिक परीक्षाएं नहीं दे पाए। इनमें आए बदलाव से चिंतित इनके परिजन हमसे मिले। हमने चेकअप करवाने की सलाह दी। दोनों का बड़ा भाई भी पहले इसी स्कूल का विद्यार्थी था। 

बच्चों में हिस्टीरिया, लोग अकेला छोड़ें : डॉ. शर्मा 
आईजीएमसी शिमला के मनोचिकित्सा विज्ञान के प्रमुख चिकित्सक और राज्य के जाने-माने मनोवैज्ञानिक डॉ. रविचंद्र शर्मा का कहना है कि यह अंधविश्वास है। बच्चों में यह महज मनोविकार है। ऐसे लोग अचेतन में कुंठा का समाधान ढूंढने को ऐसा करते हैं।

वे जानबूझकर ऐसा नहीं करते। अचेतन मन यह सब करवाता है कि कोई खुद को देवी मान लेता है तो कोई देवता। जितना लोग वहां जाएंगे, उतना ही अंधविश्वास बढ़ता जाएगा। समाज शास्त्री मोहन झारटा ने भी इसे अंधविश्वास बताया है। 

दवाएं खाना छोड़ीं, फिर शुरू कीं 
ठियोग क्षेत्र के माहोरी गांव के पंकज कुमार का कहना है कि उनके एक रिश्तेदार को ब्लड कैंसर है। उन्होंने बलग जाकर ब्लड कैंसर की दवाएं छोड़ दीं। पीजीआई में इलाज चल रहा है। डॉक्टरों ने जब उनको चेताया कि ऐसा करने से जान भी जा सकती है। तब जाकर दोबारा से दवा खानी शुरू की।
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प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

बलग स्थानीय निवासी सुरेश कुमार शर्मा कहते हैं कि यह सब सौ फीसदी झूठ है। बच्चों के पीछे कुछ लोग हो सकते हैं। जो इनसे स्थानीय देव समाज पर भी टीका-टिप्पणी करवा रहे हैं। प्रशासन इसमें हस्तक्षेप करे। 

तीन चौकियों के जवान लगा दिए, नहीं मान रहे लोग : एसडीएम
शिमला। एसडीएम ठियोग मोहन दत्त शर्मा ने कहा कि भीड़ को ज्यादा देखते हुए हमें फागू, देहा और छैला पुलिस चौकियों से बलग में पुलिसकर्मी तैनात करने पड़ रहे हैं। प्रशासन से तहसीलदार, डीएसपी समेत कई अधिकारी मौके पर भेजे जा चुके हैं। भीड़ में कोई नुकसान न हो, इसका ध्यान रखा गया है।

अब तो बच्चे भी लोगोें को यहां न आने की सलाह दे रहे हैं, मगर लोग मान नहीं रहे हैं। लोगों से आग्रह है कि वे अंधविश्वास छोड़ें। किसी ने बच्चों के बारे में अफवाह फैलाई। उसी के बाद ये सब गड़बड़ हुआ है। हमारे पास किसी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं भी नहीं आई। तभी प्रशासन कुछ कर सकता है।
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