धर्मशाला में 19 मार्च को होने वाले भारत-पाकिस्तान टी-20 वर्ल्ड कप के मैच के पक्ष में बिलासपुर के पूर्व सैनिक आगे आए हैं। कारगिल में शहीद हुए राजकुमार के बेटे राहुल वशिष्ठ सहित पूर्व सैनिकों ने भारत-पाक क्रिकेट मैच धर्मशाला में करवाने की बात कही है।
पूर्व सैनिकों ने इस बाबत बुधवार को प्रदेश भाजपा कार्यकारिणी सदस्य विक्रम शर्मा के नेतृत्व में एसडीएम घुमारवीं की अनुस्थिति में उनके पीए के माध्यम से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने मैच को पूरी तरह से सुरक्षा मुहैया करवाने का आग्रह किया।
पूर्व सैनिकों ने कहा कि खेल को राजनीति से दूर रखना चाहिए। क्योंकि खिलाड़ी जब दूसरे देश में खेलने के लिए जाते हैं, तो वे भाईचारे के साथ अमन, शांति का पैगाम देते हैं। यदि धर्मशाला में प्रदेश सरकार द्वारा सुरक्षा न देने से इस मैच का आयोजन नहीं हो पाता है तो इसके दूरगामी परिणाम प्रदेश के खेल प्रेमियों को भुगतने पड़ेंगे।
प्रेषित ज्ञापन में उन्होंने वर्ष 2009 में श्रीलंका की टीम पर पाकिस्तान में हुए आतंकवादी हमले का जिक्र भी किया। विक्रम शर्मा ने कहा कि यह प्रदेश के लिए गौरव का विषय है कि सांसद और बीसीसीआई सचिव अनुराग सिंह ठाकुर के अथक प्रयासों से हिमाचल के धर्मशाला में टी-20 विश्व कप के 12 मैच के आयोजन का मौका मिला है।
प्रतिनिधिमंडल में कर्नल नरेश ठाकुर, कैप्टन भाग सिंह, कैप्टन अमर सिंह, सूबेदार अमर सिंह, सूबेदार बीरबल राम, सूबेदार ईश्वर चंद, सूबेदार प्रेम लाल, हवलदार प्रवीण रतवान, हवलदार जगदीश चंद, हवलदार कर्म सिंह तथा राहुल वशिष्ठ सहित अन्य मौजूद थे।
कारगिल शहीद का बेटा मैच का पक्षधर: करगिल शहीद राजकुमार के पुत्र राहुल वशिष्ठ का कहना है कि खेलों में शहीदों को बेवजह घसीटा जा रहा है। जोकि वास्तव में शहीदों का अपमान है। खिलाड़ी केवल खिलाड़ी होता है, उसे आतंक की दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए। खेल कार्यक्रमों को सुरक्षा देना प्रदेश सरकार की जिम्मेवारी है। राहुल ने उम्मीद जताई कि प्रदेश हित में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह मैच को सफल बनाने तथा प्रदेश की गरिमा के लिए अवश्य योगदान देंगे।
मैच का विरोध करने वाले अपने परिवारों को उतारें सड़क पर- टी-20 वर्ल्ड कप के धर्मशाला में प्रस्तावित भारत-पाक मैच की सियासत के खिलाफ अब शहीदों के परिवार उतर आए हैं। इनका आरोप है कि मैच का विरोध करने से पहले किसी भी नेता या व्यक्ति विशेष ने उनसे नहीं पूछा।
अब विरोध करने को शहीद परिवारों को सड़क पर लाया जा रहा है, जबकि विरोध करने वालों के अपने परिजन घर में आराम फरमा रहे हैं। कांगड़ा की जयसिंहपुर तहसील की सकोह पंचायत के अंद्राणा गांव से शहीद परिवारों के सदस्यों सुखदेव चंद, कुशल चंद, शकुंतला देवी और अशोक भंगाड़िया का कहना है कि यदि नेता असल में मैच का विरोध कर रहे हैं तो अपने परिजनों को भी सड़क पर उतारें।
अंद्राणा गांव से पहले विश्वयुद्ध से लेकर अब तक 17 सैनिकों ने देश पर कुर्बानी दी है, जबकि 35 परिवारों वाले छोटे से गांव में वर्तमान में भी एक दर्जन से अधिक सैनिक सेना में सेवाएं दे रहे हैं लेकिन केंद्र और प्रदेश सरकार ने इस गांव में रह रहे शहीद परिवारों की स्थिति तक नहीं जानी हैं। मैच पर राजनीति करने के लिए अब शहीद परिवारों की याद आ गई है।
गांव से पहले विश्वयुद्ध में शहीद चंद्रभान, रूप सिंह, बख्शी चंद सहित दूसरे विश्व युद्ध में शहीद पृथ्वी चंद, भूमि चंद, रघुवीर सिंह, 1962 में सूबेदार जगत सिंह, उत्तम चंद और 1971 में चत्तर सिंह ने अपने जान की कुर्बानी दी है। उन्होंने कहा कि सैनिक देश के लिए शहीद होता है न कि प्रदेश पर। इसलिए मैच के नाम पर शहीदों के परिवारों को न घसीटा जाए।