उद्योगपति अनुराग पुरी, डीआर शर्मा, हरीश आनंद, दरबेश झा, एसके गोयल, वीरेंद्र ठाकुर सहित कई अन्य ने भी सुझाव दिए। बिजली बोर्ड के प्रबंध निदेशक जेपी कालटा सहित कई अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। बोर्ड अधिकारियों ने अपने आय और व्यय से आयोग को अवगत कराया।
जेपी कालटा ने बताया कि अन्य प्रदेशों में बिजली कर्मचारियों का वेतन और पेंशन का खर्च वहां की सरकारें उठाती हैं। हिमाचल में यह खर्च बिजली बोर्ड को उठाना पड़ रहा है। इस कारण बोर्ड का खर्च अधिक है।
वोल्टेज पर आधारित दरें तय की जानी चाहिए। डिमांड चार्जिस, चार्जेबल कांट्रेक्ट डिमांड और नाइट चार्जिस को कम किया जाए। सरचार्ज को दो फीसदी से घटाकर एक फीसदी किया जाए।
औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली के अघोषित कट बंद किए जाएं। बोर्ड ने बेवजह बड़े अधिकारियों के पद सृजित कर दिए हैं। डेपुटेशन पर भी अधिक खर्च आ रहा है। इसमें कमी लाई जाए।
जन सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से गौ सदनों के लिए बिजली के घरेलू कनेक्शन देने की मांग की गई। संबंधित विभाग के सदस्य सचिव ने कहा कि गौ संरक्षण के क्षेत्र में सरकार गंभीरता से काम कर रही है।
दो साल से नहीं हुई है बिजली दरों में बढ़ोतरी
हिमाचल में साल 2016 में घरेलू बिजली की दरें 3.5 फीसदी बढ़ाई गई थीं। इससे पूर्व साल 2014-15 में बिजली दरें बढ़ाई गई थीं। साल 2017-18 में चुनावी साल होने के चलते दरों में इजाफा नहीं हुआ। 2018-19 में लगातार दूसरे साल भी प्रदेश में घरेलू बिजली की दरें नहीं बढ़ी थीं।