इसका मतलब है कि उद्योगों को जमीन उपलब्ध कराने के साथ ही सड़क, बिजली, पानी, ड्रेनेज और अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाएं विकसित रूप में मिल सकेंगी। इससे निवेशकों को इकाई स्थापित करने में कम समय लगेगा और प्रदेश में नए उद्योग लगाने की प्रक्रिया भी तेज होगी। प्रदेश सरकार इन पार्कों को औद्योगिक निवेश के नए केंद्र के तौर पर विकसित करना चाहती है। केंद्र से स्वीकृति और वित्तीय सहायता मिलने के बाद जमीन के विकास तथा आधारभूत ढांचे से जुड़े कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। मझोली और बीटन की जमीन का निरीक्षण इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हिमाचल में चार औद्योगिक पार्क का निर्माण होना है। एक प्रस्तावित औद्योगिक पार्क के लिए चयनित जमीन का केंद्रीय टीम ने जमीन का निरीक्षण किया है। दो पार्क की डीपीआर केंद्र को भेजी गई थी। अब दो अन्य पार्क की डीपीआर तैयार की जा रही है। - हर्षवर्धन चौहान, उद्योग मंत्री, हिमाचल सरकार