डल तोड़ने की प्रथा को पूर्ण करने के बाद एक छोर से पवित्र डल के बीचोंबीच होकर दूसरे छोर पर पहुंचने वाले चेलों को शिव भक्त कंधों पर उठाकर लाते हैं। मान्यता है कि डल तोड़ बाहर निकलने वाले चेलों को जो भी व्यक्ति पहले पहुंच कर कंधों पर उठाता है उस पर शिव शंकर की विशेष कृपा बनी रहती है।
चेलों के डल को पार करने के बाद बड़े शाही स्नान की पर्वी आरंभ हो जाएगी। पवित्र मणिमहेश के दौरान होने वाले शाही स्नान के शुभ मुहूर्त के मौके पर पवित्र कैलाश पर भोले के भक्तों को चौथे पहर टिमटिमाते हुए मणि के दर्शन होने की मान्यता है।
इसी के चलते अधिकाधिक भोले के भक्त शाही स्नान की रात पवित्र डल में रुककर रात भर भजन-कीर्तन करते हैं। पवित्र मणिमहेश यात्रा पर आने वाले हरेक श्रद्धालु को मणि के दर्शन नहीं होते।