देवी-देवताओं की विदाई के साथ शनिवार को सात दिवसीय मंडी महाशिवरात्रि महोत्सव 2023 का समापन हो गया। महोत्सव की चौथी और अंतिम जलेब (शोभायात्रा) राजदेवता माधोराय की अगुवाई में शाही अंदाज में निकली। जलेब में राजदेवता माधोराय की पालकी के साथ एक दर्जन से अधिक देव रथ चले। देवताओं के साथ नाचते-गाते देवलुओं संग जलेब का नजारा देखते ही बन रहा था।
जलेब में कृषि एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी बतौर मुख्यातिथि मौजूद रहे। मेले का समापन वैसे तो राज्यपाल करते हैं, लेकिन व्यस्तता और अन्य कारणों से उनका दौरा रद्द हो गया। राज्यपाल की जगह कृषि एवं बागवानी मंत्री को बुलाया गया। उधर, महोत्सव की अंतिम जलेब को देखने के लिए सड़क के दोनों तरफ लोगों की भीड़ उमड़ी। इस बार शिवरात्रि के देव समागम में करीब 191 पंजीकृत देवी-देवता पहुंचे। शिवरात्रि महोत्सव के समापन पर शनिवार को चौहटा की जातर के बाद दोपहर करीब सवा दो बजे जलेब शुरू हुई।
कृषि मंत्री ने राजदेवता माधोराय और आराध्य देव बाबा भूतनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर जलेब धूमधाम से चौहाटा, मोती बाजार, समेखतर, बालकरूपी, भूतनाथ बाजार होते हुए चौहाटा से पड्डल मैदान पहुंची। जलेब में सबसे आगे पुलिस घुड़सवारी, बैंड, पुलिस जवान, महिला पुलिस कर्मी मार्चपास्ट करते चल रही थीं। देवता छाजणू व छमाहूं जलेब में सबसे आगे रहे। इसके बाद कोटलू घटोत्कच, देव कोटलू, देव विष्णु मतलोड़ा, देव मगरू महादेव, बायला नारायण, देव चपलांदू नाग, सराज घाटी के देव बिट्ठू नारायण, लक्ष्मी नारायण, तुंगासी ब्रह्मदेव, महामाया निहरी, अंबिका नाऊ, राज देवता माधोराय की पालकी, शुकदेव ऋषि थट्टा, शुकदेव ऋषि शारटी आदि देवता जलेब में साथ चले। देव रथों के साथ ढोल, नगाड़े, शहनाई, रणसिंगों की धुनों पर देवलू भी नाचते गाते जलेब की शोभा बढ़ाई। जलेब पड्डल मैदान पहुंचने के बाद मुख्यतिथि ने शिवरात्रि महोत्सव का विधिवत समापन किया।
छोटी काशी की खुशहाली के लिए देव आदि ब्रह्मा ने बांधी कार
अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव के अंतिम दिन शनिवार को प्राचीन परंपरा के अनुसार उत्तरशाल क्षेत्र के देव आदि ब्रह्मा ने छोटी काशी मंडी की परिक्रमा कर खुशहाली के लिए कार बांधी। इंदिरा मार्केट स्थित सिद्धकाली मंदिर के मुख्यद्वार सेरी बाजार से कार बांधने की प्रक्रिया शुरू हुई। सेरी मंच में देवता की कार बांधने के लिए काफी संख्या में लोग उपस्थित रहे। देवता के साथ देवलू और कारदार वाद्य यंत्रों पर तलवारों के साथ नाचते गाते साथ चल रहे थे। मंडी शहर की खुशहाली और समृद्धि के लिए देव आदि ब्रह्मा ने कार बांधी। देव रथ के साथ गूर ने शहर की परिक्रमा करते हुए नगर वासियों की सुख समृद्धि के लिए कामना की। देवता के देवलुओं ने जौ के आटे को गुलाल की तरह हवा में उछाल कर बुरी आत्माओं को दूर भगाया। परिक्रमा कर देवता के साथ देवलू पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ नाचते गाते चल रहे थे। अंतिम दिन टारना मंदिर में विराजमान जनपद के बड़ादेव कमरुनाग अपने मूल स्थान रवाना होने से पहले सेरी मंच की पौड़ियों पर कुछ देर के लिए बैठे। यहां सैकड़ों लोगों ने देव कमरुनाग के दर्शन किए। महाशिवरात्रि महोत्सव के आखिरी दिन देव समागम में पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों से छोटी काशी गूंज उठी।
देवता कमरुनाग के दर्शनों के लिए लगीं कतारें
टारना मंदिर में सात दिन से ठहरे बड़ादेव कमरुनाग ने देवी-देवताओं को विदा करने के लिए चौहाटा जातर में पहुंचे। इसके बाद सेरी मंच की पौड़ियों के पास थोड़ी देर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए। देव कमरुनाग के दर्शन के सेरी की पौड़ियों पर लंबी कतारें लगी रहीं।