भाजपा सांसद रामस्वरूप शर्मा के असमय निधन के बाद खाली हुई मंडी लोकसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब जयराम सरकार के लिए 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले का लिटमस टेस्ट बन जाएगा। चूंकि इससे पहले कांग्रेस विधायक सुजान सिंह पठानिया के निधन के बाद फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव प्र्रस्तावित है। यह चुनाव ऐसे समय पर होगा, जब सरकार के साढ़े तीन साल पूरे हो चुके होंगे और अगले साल लगभग इसी समय 2022 के विधानसभा का चुनावी बिगुल बजने वाला होगा। जाहिर है सरकार के लिए यह चुनाव इसी वजह से काफी अहम है।
अगर विधानसभा और लोकसभा का उपचुनाव भारत निर्वाचन आयोग ने एक साथ कराया तो प्रदेश के कांगड़ा, मंडी, कुल्लू, लाहौल स्पीति और शिमला जिला की कुल 18 विधानसभा सीटों पर मतदाता सरकार के कामकाज पर मतदान के जरिये फैसला करेंगे। इससे सरकार का फाइनल से पहले का रिपोर्ट कार्ड तैयार हो जाएगा। वहीं, अप्रैल के पहले हफ्ते में पालमपुर, धर्मशाला, सोलन और मंडी नगर निगम क्षेत्र में भी पार्टी चिह्न पर चुनाव होने हैं। ऐसे में सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के लिए भी 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले दो बार तैयारियां करने और जनता की नब्ज पकड़ने का मौका होगा।
एक साथ हो सकते हैं दोनों उपचुनाव
सांसद रामस्वरूप के निधन के बाद हिमाचल प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने स्वत: संज्ञान लेते हुए भारत निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर आधिकारिक रूप से मंडी संसदीय क्षेत्र के रिक्त होने की सूचना दे दी है। इससे पहले सीईओ ने फतेहपुर में 29 अप्रैल को पांच राज्यों के मतदान के अंतिम चरण के दिन मतदान कराने का प्रस्ताव भेजा था। लेकिन सूत्रों का कहना है कि चूंकि विधानसभा उपचुनाव का खर्च केंद्र व राज्य सरकारों को आधा आधा वहन करना होता है। जबकि लोकसभा उपचुनाव का पूरा खर्च केंद्र वहन करता है। ऐसे में निर्वाचन आयोग दोनों ही उपचुनाव एक साथ जुलाई के आसपास कराने पर विचार कर सकता है।