सड़क पर अनाथ बच्चे को भीख मांगते देख उनके लिए कुछ करने की ठानने वाली मनाली की सुदर्शना देवी समाज के लिए उम्मीद की मशाल बनी हुई हैं। वे आज 22 अनाथ बच्चों का न सिर्फ पेट पाल रही हैं बल्कि उन्हें अच्छी तालीम भी दिलवा रही हैं। सुदर्शना ने अपने घर को बच्चों के आश्रम में तब्दील कर दिया है। वे खुद और इलाके की अन्य महिलाओं के सहयोग से जुराबें बुनती हैं और उन्हें बेचकर बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं।
सुदर्शना के जीवन में एक समय ऐसा भी आया कि बच्चों को खिलाने के लिए उसके पास फूटी कौड़ी भी नहीं बची। रातभर जुराबें बुनकर सुबह सड़क पर बेचती थीं। उससे मिले पैसों से रोज खाना बनता था। बच्चों की तीन वक्त की रोटी के लिए सुदर्शना ने अपने गहने तक बेच दिए। सुदर्शना सब्जी मंडी में फेंके गोभी के पत्ते उठाकर बच्चों का जैसे-तैसे पेट भरती थीं, लेकिन मुफलिसी के बावजूद किसी के आगे हाथ नहीं फैलाए।