देश की सहरदी सामरिक सड़कों को चकाचक कर सेना की मुश्किलें जल्द कम हो होने वाली हैं। 14 से 18 हजार फुट की उंचाई से होकर गुजरने वाली 485 किलोमीटर लंबी मनाली-लेह सड़क मार्ग के डबल लेन का काम अपने अंतिम चरण में है। अब महज 20 किलोमीटर टारिंग का काम बाकी रह गया है।
सड़क चकाचक होने सैन्य वाहन लेह छह घंटे जल्दी पहुंचेगे। अरबों रुपये के इस महत्वपूर्ण सडक प्रोजेक्ट को साल 2012 तक पूरा किया जाना था। लेकिन विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण मनाली-लेह मार्ग को समय पर पूरा नहीं किया जा सका है। बर्फबारी के कारण साल के 6 महीनों तक मनाली-लेह सड़क मार्ग के निर्माण कार्य को जारी रख पाना संभव नहीं है।
श्रीनगर-जोजिला-लेह के बाद मनाली-लेह मार्ग देश का दूसरा ऐसा इकलौता सामरिक मार्ग है जो बर्फबारी के कारण साल में करीब 6 महीनों तक हर तरह के वाहनों की आवाजाही के लिए बंद हो जाता है। इसके बावजूद मनाली-लेह सड़क सेना के लिए सामरिक लिहाजा से बेहद महत्वपूर्ण है।
महज 3 महीने के भीतर बीआरओ ने मनाली-लेह मार्ग पर करीब 30 किलोमीटर टारिंग के अलावा कई किलोमीटर डबल लेन का काम पूरा कर लिया है। बीआरओ का दावा है 485 किलोमीटर लंबे मनाली-लेह मार्ग पर अब महज 10 किलोमीटर के दायरे में टारिंग करना बाकी रह गया है।
सड़क मार्ग चकाचक होने के बाद सेना के वाहनों को लेह पहुंचने के लिए 20 की बजाय महज 14 घंटे का समय लगेगा। सैन्य वाहनों के ईंधन का खर्चा भी घट जाएगा। इसके अलावा लदाख और हिमाचल के पर्यटन कारोबार को भी गति मिलेगी। सीमा सड़क संगठन के 38 टास्क फोर्स के कमांडर कर्नल ने दावा किया है कि अगले साल के अंत तक शेष बचे टारिंग के काम को पूरा कर लिया जाएगा।