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हिमाचल प्रदेश: भारी भूस्खलन होने से मनाली-लेह मार्ग यातायात के लिए बंद, बादल फटने से सड़क पर आया मलबा

Thu, 03 Jul 2025 09:46 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, मनाली/ऊना

सार

बादल फटने से हुई भारी बारिश के कारण स्नो गैलरी के समीप बहने वाला नाला उफान पर आ गया। जिससे भारी मात्रा में मलबा सड़क पर आ गया है।
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मनाली-लेह मार्ग पर आया मलबा - फोटो : संवाद
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विस्तार
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सोलंगनाला से कुछ दूर पहली स्नो गैलरी के पास भारी भूस्खलन होने से मनाली-लेह मार्ग यातायात के लिए बंद हो गया। बादल फटने से हुई भारी बारिश के कारण स्नो गैलरी के समीप बहने वाला नाला उफान पर आ गया। इससे भारी मात्रा में मलबा सड़क पर आ गया है। डीएसपी मनाली केडी शर्मा ने बताया कि सीमा सड़क संगठन को यातायात बहाल करने के लिए कहा गया है।
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डरोह गांव के पास सड़क पर गिरा चीड़ का पेड़
बड़सर से भ्यांबी मार्ग पर डरोह गांव के समीप एक चीड़ का विशाल पेड़ सड़क पर गिरने से यातायात बाधित हो गया। इस दौरान हिमाचल पथ परिवहन निगम की बस भी मार्ग में फंसी रही। बस के चालक देसराज और परिचालक रवि ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत कट्टर (आरी) मंगवाकर पेड़ को हटवाने की व्यवस्था की। दोनों कर्मचारियों की तत्परता और सूझबूझ के चलते मार्ग को शीघ्र ही साफ किया गया और यातायात बहाल हो पाया। स्थानीय लोगों ने भी इस कार्य में सहयोग दिया। स्थानीय जनता ने चालक देसराज और परिचालक रवि की जिम्मेदारीपूर्ण पहल की सराहना की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते यह कदम न उठाया गया होता, तो लंबा जाम लग सकता था और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता।
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 टक्का स्कूल में घुसा बारिश का पानी
कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले टक्का स्कूल में  भारी बारिश के चलते पानी भर गया। बताया जा रहा है कि यह पानी झम्बर और कुरियाला क्षेत्र से बहकर स्कूल परिसर तक पहुंचता है, जिससे स्कूल के प्रांगण और आसपास का इलाका जलमग्न हो गया। स्थानीय लोगों और स्कूल स्टाफ का कहना है कि बरसात के मौसम में यह समस्या हर बार सामने आती है, लेकिन इस बार पानी स्कूल भवन तक घुस गया, जिससे विद्यार्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।  फिसलन भरी जमीन पर बच्चों का चलना जोखिम भरा हो गया है। अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द ही जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में स्कूल के बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा पर कोई असर न पड़े। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि जब तक स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए अस्थायी उपाय किए जाएं।
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