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Shimla News: चरस तस्करी में दोषी को पांच साल कठोर कारावास की सजा

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विशेष न्यायाधीश वन की अदालत का फैसला
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50 हजार रुपये जुर्माना भी करना होगा अदा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। विशेष न्यायाधीश वन (एनडीपीएस) प्रवीण गर्ग की अदालत ने चरस तस्करी के मामले में दोषी शमशेर सिंह उर्फ शेरा निवासी पंजाब तरनतारन को पांच साल के कठोर कारावास और 50,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषी को एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने मामले में दो अन्य सह अभियुक्तों को पकड़ी गई चरस में संयुक्त कब्जा और आपराधिक साजिश सिद्ध नहीं होने पर बरी कर दिया है। मामला 15 मई 2025 का है जब स्पेशल सेल शिमला के प्रभारी अंबीलाल अपनी टीम के साथ शोघी बैरियर पर मौजूद थे। इस दौरान सोलन की ओर आ रही चंडीगढ़-शिमला रूट की बस को तलाशी के लिए रोका गया। इस दौरान सीट नंबर 34 में बैठे शमशेर सिंह, सीट नंबर 32 पर बैठे जगजीत सिंह और सीट नंबर 33 पर बैठे प्रेम सिंह से पूछताछ की। इस दौरान जगजीत सिंह और प्रेम सिंह की तलाशी में कुछ संदिग्ध बरामद नहीं हुआ लेकिन शमशेर सिंह के बैग से 742 ग्राम चरस बरामद की गई।
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पुलिस ने स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में चरस को कब्जे में लेकर आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 और 29 के तहत बालूगंज थाना में केस दर्जकर मामले की छानबीन शुरू की। पुलिस ने मामले की जांच में आरोपियों से पूछताछ और अन्य सभी पहलुओं की गंभीरता से पड़ताल की। इसमें खुलासा हुआ था कि आरोपी पंजाब से शिमला के लिए चरस लेकर आ रहे थे। पुलिस ने जांच पूरी होने के बाद सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के मद्देनजर मामले के मुख्य अभियुक्त शमशेर सिंह उर्फ शेरा निवासी पंजाब तरनतारन को दोषी करार दिया है। जगजीत सिंह और प्रेम सिंह के बैग से कुछ नहीं मिला है। अदालत ने माना कि केवल एक ही बस में यात्रा करना, एक ही टिकट या एक ही गंतव्य होना आपराधिक साजिश (एनडीपीएस एक्ट की धारा 29) या संयुक्त कब्जे का सबूत नहीं है। इसको देखते हुए दोनों सह अभियुक्तों को बरी कर दिया है।
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