मान्यता है कि तत्तापानी महर्षि जमदग्नि की तपोस्थली रही है। ऐसे में लोगों की तत्तापानी में मकर संक्रांति के पावन पर्व को लेकर गहरी आस्था है। स्थानीय पंडित भक्ति प्रकाश ने बताया कि लोग नवग्रह की शांति के लिए तुलादान करवाने आते हैं। यहां पर गर्म पानी के चश्मे थे। लोग सतलुज किनारे स्नान करते थे। अब गर्म पानी के चश्मे कोल बांध परियोजना में डूब गए हैं। स्नान करने के लिए सतलुज किनारे व्यवस्था की गई है। मकर संक्रांति के अलावा हर शनिवार को यहां श्रद्धालु आते हैं। पंडित संजू शर्मा ने कहा कि माघ महीने में जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तो इसमें दान का विशेष महत्व होता है। प्रयागराज में महाकुंभ चला है। मान्यता है कि प्रयागराज के बराबर ही तत्तापानी में पुण्य मिलता है।
मकर संक्रांति के दिन तत्तापानी में खिचड़ी दान करने की सदियों से परंपरा चली आ रही है। धार्मिक तीर्थ स्थल में जगह-जगह प्रसाद के रूप में खिचड़ी भी परोसी गई। तत्तापानी के नाम खिचड़ी पकाने का विश्व रिकॉर्ड भी है। यहां साल 2020 में मकर संक्रांति में एक ही बर्तन में 1995 किलोग्राम खिचड़ी बनाई गई थी। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में यह रिकॉर्ड दर्ज हुआ है।
ये किंवदंतियां हैं ततापानी के चश्मों के पीछे
ततापानी में गर्म पानी के चश्मों की उत्पत्ति के बारे में तरह-तरह की किंवदंतियां प्रसिद्ध हैं। जाने-माने पुराणवक्ता डाॅ. गोकुलचंद शर्मा के अनुसार ततापानी के बारे में एक किंवदंती ये है कि प्राचीनकाल में इस क्षेत्र में परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि तपस्या कर रहे थे। उन्होंने इस तपोस्थली में गर्म पानी के चश्मे प्रकट किए। एक अन्य किंवदंती ये भी है कि यहां पर जमदग्नि ऋषि के पुत्र परशुराम स्नान कर रहे थे। उन्होंने जब अपने वस्त्र निचोड़े तो यहां पर गर्म पानी हो पैदा हो गया। यहां गंधक के पहाड़ हैं। इनसे गैस बनती है, उनसे भी गर्म पानी निकलता है।
पहले तीन बार होता था स्नान
पवित्र स्थल तत्तापानी में तीन बार स्नान करके राहु की दशा को शांत कराया जाता था। प्रथम स्नान के बाद पांडे लोगों को काले कपड़े पहनने को देते हैं। इन काले कपड़ों में लोगों से राहु का पूजन कराया जाता था। इसके बाद ग्रह के मारे व्यक्ति को अनाज, लोहा, माश की दाल, सरसों के तेल के साथ तोला जाता है। पूजा होने के बाद फिर व्यक्ति से स्नान कराया जाता है। इसके बाद पंडित लोगों से सूर्य देव की पूजा कराते हैं। पंडितों के मुताबिक ऐसा करने से राहु की दशा शांत हो जाती है।
2020 में बना था विश्व रिकॉर्ड
वर्ष 2020 में मकर संक्रांति के अवसर पर एक ही बर्तन में 1995 किलोग्राम खिचड़ी पकाने का विश्व रिकॉर्ड गिनीज बुक में दर्ज हुआ था। सवा सात फीट चौड़े, चार फीट ऊंचे बर्तन में 25 शेफ की मदद से पांच घंटे में इस खिचड़ी को तैयार किया गया। विशाल पतीले का वजन क्रेन की मदद से उठाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के प्रतिनिधि ऋषि नाथ की उपस्थिति में किया गया था।
जौ की जूब देकर लिया बड़ों का आशीर्वाद, पारंपरिक पकवानों की खुशबू से महकी कुल्लू घाटी
कुल्लू जिले में मकर संक्रांति का पर्व धूमधाम से मनाया गया। मकर संक्रांति पर जौ की जूब देकर लोगों ने अपने से बड़ों का आशीर्वाद लिया। देवी-देवताओं की भी विशेष पूजा-अर्चना की गई। पारंपरिक व्यंजनों घी-खिचड़ी, भल्ले आदि की खुशबू से घाटी महक उठी। ग्रामीण क्षेत्रों में सात दिन तक मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। मकर संक्रांति का पर्व कुल्लू जिले के लोगों में उत्साह देखने को मिला।