पुलिस आरोपियों के संपर्कों और नेटवर्क को खंगाल रही है। प्रारंभिक जांच में कई राज्यों में तस्करी का जाल फैले होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस जांच में पता चला है कि महिला आरोपी ने खुद को बच्चों की बुआ बताकर उन्हें अपने साथ रखा था, लेकिन जिला बाल संरक्षण समिति की जांच में उसका दावा झूठा निकला। इसके बाद बाल मजदूरी के लिए मानव तस्करी का मामला उजागर हुआ। आरोपी महिला की पहचान दुलारी देवी, निवासी झारखंड के रूप में हुई है, जबकि गिरफ्तार दूसरे आरोपी की पहचान मंडी, निवासी सत्या के तौर पर हुई है। पुलिस दोनों के बैंक खातों के लेनदेन की भी जांच कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, झारखंड से पांच बच्चों को लाए जाने की बात सामने आई है। अभी तक दो नाबालिगों को रेस्क्यू किया जा चुका है, जबकि अन्य की तलाश और पहचान में पुलिस जुटी है। हालांकि इस संबंध में पुलिस ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। मामले की जानकारी चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को मिली थी। शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए टीम ने मट्टनसिद्ध से दोनों बच्चों को रेस्क्यू किया, जिन्हें एक दिन पहले ही कुल्लू से वापस लाया गया था। प्रारंभिक शिकायत में कहा गया था कि दुलारी देवी मंडी निवासी व्यक्ति के कहने पर झारखंड से पांच नाबालिग बच्चों को लाई थी। जांच के बाद उसका रिश्तेदारी का दावा गलत पाया गया। रेस्क्यू किए गए बच्चों को उनके परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
वहीं, जिला बाल संरक्षण समिति के अध्यक्ष मनीष राणा ने बताया कि जांच के बाद पुलिस को औपचारिक शिकायत सौंपी गई है। एसपी बलवीर सिंह ठाकुर ने पुष्टि की कि आरोपियों की 16 फरवरी तक पुलिस रिमांड मिली है और मामले के वित्तीय व अन्य पहलुओं की गहन जांच जारी है।