कोर्ट ने सिंघवी की उस दलील को नहीं माना, जिसमें गवाहों की सूची को फालतू और परेशान करने वाला बताया था। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ नहीं है, जिससे लगे कि यह केवल समय बर्बाद करने के लिए किया जा रहा है। सिंघवी की ओर से पहले पेन ड्राइव, जिसमें गिनती की वीडियो रिकॉर्डिंग थी, उसकी सत्यता से इन्कार किया था। कोर्ट ने कहा कि जब दस्तावेज को नकारा गया है, तो प्रतिवादी को उसे गवाहों के जरिये साबित करने का पूरा मौका मिलना चाहिए। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि मामले को अब 20 अप्रैल को अतिरिक्त रजिस्ट्रार (न्यायिक) के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए। उस दिन हर्ष के गवाहों के बयान दर्ज करने की तारीख तय की जाएगी। अदालत ने दोनों पक्षों को सख्त हिदायत दी है कि मामले में बेवजह स्थगन न मांगा जाए।
राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सच्चाई को दबाने की हर कोशिश नाकाम होगी। कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता अदालत में भी सच्चाई से बचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन न्यायालय ने साफ कर दिया कि सच्चाई सामने आएगी और पूरी पारदर्शिता के साथ आएगी। यह सिर्फ कानूनी जीत नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जीत है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब तथ्य कमजोर हों तो कांग्रेस साक्ष्यों से भागती है, लेकिन भाजपा सच्चाई के साथ खड़ी है और हर मंच पर जवाब देने के लिए तैयार है। इस फैसले के बाद अब मामले की सुनवाई आगे साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर जारी रहेगी।