हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मेडिकल अफसरों की भर्ती में राज्य सरकार की ट्रेनी नीति पर रोक लगाते हुए स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति की मूल शर्तें नहीं बदली जा सकतीं। अनुबंध आधार पर विज्ञापित पदों पर चयन के बाद डॉक्टरों को जॉब ट्रेनी बनाना उचित नहीं है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि डॉक्टरों को वर्ष 2024 के सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम के आधार पर ट्रेनी बनाया गया था, जबकि हाईकोर्ट पहले ही देवेंद्र कुमार मामले में इस कानून को असांविधानिक घोषित कर निरस्त कर चुका है। ऐसे में इसके आधार पर नियुक्ति को ट्रेनी के रूप में कायम नहीं रखा जा सकता।