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डॉक्टरों को राहत: हाईकोर्ट ने कहा- भर्ती के बाद नहीं बदल सकते हैं नियम, ट्रेनी नीति असांविधानिक

Fri, 02 Oct 2026 05:24 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

सरकारी कर्मचारी (भर्ती और सेवा शर्तें) अधिनियम 2024 के तहत राज्य सरकार ने कर्मचारियों को ट्रेनी के रूप में नियुक्त करने की नीति को हाईकोर्ट ने गैर कानूनी और असांविधानिक घोषित कर दिया है। स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद खेल के बीच में नियम नहीं बदले जा सकते। 
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मेडिकल अफसरों की भर्ती में राज्य सरकार की ट्रेनी नीति पर रोक लगाते हुए स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति की मूल शर्तें नहीं बदली जा सकतीं। अनुबंध आधार पर विज्ञापित पदों पर चयन के बाद डॉक्टरों को जॉब ट्रेनी बनाना उचित नहीं है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि डॉक्टरों को वर्ष 2024 के सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम के आधार पर ट्रेनी बनाया गया था, जबकि हाईकोर्ट पहले ही देवेंद्र कुमार मामले में इस कानून को असांविधानिक घोषित कर निरस्त कर चुका है। ऐसे में इसके आधार पर नियुक्ति को ट्रेनी के रूप में कायम नहीं रखा जा सकता।

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पीजी और सुपर स्पेशलिटी के लाभ भी मिलेंगे
सरकार ने इन-सर्विस पीजी लाभों के लिए 19 जुलाई 2025 की कटऑफ डेट तय की थी। हाईकोर्ट ने यह पाबंदी हटाते हुए डॉक्टरों को जनरल ड्यूटी ऑफिसर के रूप में पीजी और सुपर स्पेशलिटी पाठ्यक्रमों के लिए पात्र माना है। उन्हें एमडी, एमएस और सुपर स्पेशलिटी के कोटे के साथ नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (एनपीए) समेत संबंधित सेवा लाभ देने के निर्देश दिए गए हैं। साहिल ठाकुर, चार्वी गुप्ता और अरुणिका ठाकुर समेत अन्य डॉक्टरों ने ट्रेनी नियुक्ति और सेवा लाभों पर रोक के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था। अदालत के आदेश से अब उनके लिए अनुबंध कर्मचारी के रूप में नियुक्ति और संबंधित सेवा लाभों का रास्ता साफ हो गया है।
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ये है पूरा मामला
यह मामला वर्ष 2024 में हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से निकाली गई मेडिकल अफसरों के 200 पदों की भर्ती से जुड़ा है। विज्ञापन के अनुसार पद अनुबंध आधार पर भरे जाने थे। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगस्त 2025 में मेरिट सूची जारी हुई, जिसमें याचिकाकर्ता डॉक्टर भी चयनित हुए। इसके बाद सरकार ने नियुक्ति के समय व्यवस्था बदलते हुए उन्हें जॉब ट्रेनी बनाने का फैसला ले लिया और ट्रेनी एग्रीमेंट साइन करने को कहा। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को 2012 के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत अनुबंध कर्मचारी माना जाए और नियुक्ति की शुरुआती तारीख से अनुबंध कर्मचारियों को मिलने वाले संबंधित लाभ दिए जाएं।
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