जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी प्रदीप कुमार उर्फ रांटा शाही महात्मा के चिट्टा तस्करी नेटवर्क का प्रमुख सहयोगी था। वह बाहरी राज्यों से चिट्टा लाकर शाही महात्मा के साथ मिलकर रोहड़ू क्षेत्र में नशे का कारोबार चला रहा था। पुलिस के अनुसार, आरोपी मुद्दसीर अहमद मोची की गिरफ्तारी के बाद प्रदीप कुमार उर्फ रांटा शाही महात्मा के साथ फरार हो गया था। बाद में शाही महात्मा को तो पुलिस ने दबोच लिया, लेकिन प्रदीप लगभग डेढ़ साल से लगातार फरार चल रहा था और पुलिस को चकमा दे रहा था। वीरवार को थाना कोटखाई और सब डिविजन ठियोग की विशेष टीम ने तकनीकी साक्ष्य एवं गुप्त सूचना के आधार पर सुनियोजित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। पुलिस के अनुसार शाही महात्मा गिरोह के नेटवर्क से करीब लगभग 500 से अधिक लोग जुड़े हैं। इस मामले में अभी और खुलासे होने की आशंका है। एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने बताया कि मुख्य नशा तस्कर के गिरफ्तार के बाद पुलिस को कुछ और सुराग मिलने की संभावना है।
चार और नशा तस्करों को गिरफ्तार कर तीन महीने के लिए भेजा जेल
नशा तस्करों के खिलाफ जिला पुलिस की कार्रवाई जारी है। पुलिस ने बार-बार चिट्टा समेत अन्य मादक पदार्थ की तस्करी में पकड़े जाने वाले चार और आरोपियों को 3 महीने के लिए जेल भेज दिया है। चारों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कई मुकदमे दर्ज हैं। गृह विभाग से मंजूरी मिलने के बाद पुलिस ने चारों आरोपियों को अलग-अलग स्थान से गिरफ्तार किया है। पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के तहत जिला पुलिस अभी तक 17 लोगों को जेल भेज चुकी है। इसमें कई ऐसे नशा तस्कर शामिल हैं जोकि दूसरे राज्यों से जिले में कई वर्षों से नशा तस्करी का अवैध कारोबार कर रहे थे। इसको देखते हुए जिला पुलिस ने इन सभी आरोपियों को प्रीवेंटिव डिटेंशन में गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई का मकसद जिले में नशे के नेटवर्क को तोड़ना और युवा पीढ़ी को चिट्टे जैसे सफेद जहर से बचाना है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मनोज उर्फ मन्ना निवासी गांव कार्याली, डाकघर मलूथी, तहसील एवं जिला शिमला शामिल है। मनोज उर्फ मन्ना के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत जिला शिमला और सोलन जिले में नौ मुकदमे दर्ज हैं। आरोपी के खिलाफ वर्ष 2018 में पहला मामला दर्ज किया गया था और इसके बाद वह लगातार नशा तस्करी के मामलों में पकड़ा गया है।
अन्वेषण एवं तकनीकी साक्ष्यों से यह स्थापित हुआ है कि मनोज उर्फ मन्ना संगठित ड्रग नेटवर्क का मुख्य संचालक है, जो पर्दे के पीछे से पूरे सिंडिकेट का संचालन करते हुए सह-अपराधियों को निर्देश एवं संसाधन उपलब्ध कराता रहा है। दूसरा आरोपी अंकित ठाकुर निवासी गांव व डाकघर नीरथ, तहसील रामपुर है। इसके खिलाफ चिट्टा तस्करी के दो केस दर्ज हैं। वर्ष 2025 में आरोपी को 47.74 ग्राम चिट्टे और वर्ष 2023 में 30.88 ग्राम चिट्टे के साथ पकड़ा जा चुका है। पुलिस का दावा है कि खुफिया सूचनाओं एवं अभिलेखों के अनुसार यह मादक पदार्थों के वितरण एवं बिक्री में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। तीसरा आरोपी गोविंद सिंह गांव बठारा डाकघर शाहधार, रामपुर जिला शिमला को तीन मामलों में गिरफ्तार किया गया है। वर्ष 2023 में आरोपी से पुलिस थाना कुमारसैन के अंतर्गत 6.30 ग्राम हेरोइन, पुलिस थाना रामपुर के अंतर्गत 2024 में 87.87 ग्राम हेरोइन/चिट्टा बरामद किया गया था। तीसरे मामले में 2025 में 6.13 ग्राम हेरोइन/चिट्टा बरामद किया गया था। चौथा आरोपी लोकिंदर कंवर दो बार गिरफ्तार किया गया है। पुलिस थाना कोटखाई के तहत वर्ष 2022 में 52.75 ग्राम चरस और 03.17 ग्राम चिट्टे और पुलिस थाना कोटखाई के अंतर्गत वर्ष 2024 में 30.640 ग्राम हेरोइन/चिट्टे के मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।
शिमला पुलिस नशा तस्करी का नेटवर्क तोड़ने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। नशा तस्करी के मामलों में लगातार पकड़े जाने वालों के खिलाफ पीआईटी एनडीपीएस के तहत कार्रवाई की जा रही है।- गौरव सिंह, एसएसपी शिमला
चिट्टे के साथ पकड़ी महिला की जमानत याचिका खारिज
वहीं विशेष न्यायाधीश रोहड़ू की अदालत ने चिट्टे के साथ पकड़ी गई आरोपी महिला की जमानत याचिका खारिज कर दी है। आरोपी महिला ने दलील दी थी कि उसके दो बच्चें हैं, जिनकी देखभाल के लिए जमानत की आवश्यकता है। वहीं, अदालत ने कहा है कि अपराध की गंभीरता देखते हुए आरोपी इस स्तर पर जमानत की हकदार नहीं है। जुब्बल थाना पुलिस ने पिछले साल 30 अक्तूबर को पुराना जुब्बल स्थित एक घर में छापेमारी की थी। इस दौरान पुलिस को 12.42 ग्राम चिट्टा और 63,690 रुपये की नकदी बरामद हुई। मामले में पुराना जुब्बल और हरियाणा के यमुनानगर की दो महिलाओं को गिरफ्तार किया गया। तबसे आरोपी महिला न्यायिक हिरासत में है। यमुनानगर की आरोपी महिला ने जमानत याचिका अदालत में दाखिल की थी, जिसमें बताया कि आरोपी का बैकग्राउंड बहुत अच्छी है। वह एक अच्छे परिवार से है। आरोपी अपने पति से अलग रह रही हैं।
उसे अपने दो नाबालिग स्कूल जाने वाले बच्चों की देखभाल करनी पड़ती है, इसलिए उसे जमानत दी जाए। दूसरी और राज्य के वकील ने तर्क दिया कि आरोपी ने बहुत बड़ा अपराध किया है। अगर जमानत दी जाती है, तो वह सुबूतों से छेड़छाड़ करेगी। आरोपी पर एनडीपीएस एक्ट के तहत एक अन्य मामला दिसंबर 2024 काे जुब्बल थाना में पंजीकृत है, इसलिए जमानत एप्लीकेशन खारिज करने की मांग की जाती है। अदालत ने जमानत पर फैसला देते हुए कहा कि मौजूदा मामले में आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर हैं। आरोपी को जमानत नहीं दी जाती है, तो उसके अपराध को दोहराने की आशंका है। अभियोजन पक्ष के सुबूतों से छेड़छाड़ करने की आशंका है, क्योंकि आरोपी बार-बार एनडी एंड पीएस अधिनियम के तहत मामलों में संलिप्त रहा है, इसलिए जमानत अर्जी को खारिज किया जाता है।