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सिर्फ एक क्लिक में पढ़िए राजधानी शिमला की बड़ी खबरें

Fri, 20 Jan 2017 12:06 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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राजधानी से सटी मशोबरा विकास खंड की भौंट पंचायत के बेबलीधार दला, डूमी पंचायत के झोलो, लोहर झोलो, मकनैना और शिला जैसे गांव के सैकड़ों लोग लोग आज भी सड़क सुविधा से महरूम हैं। आज भी किसी के बीमार पड़ जाने पर उसे राजधानी के अस्पताल पहुंचाने के लिए कई किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ता है, जिसमें कंबल और डंडों का स्ट्रेचर बनाकर मरीज को सड़क तक पहुंचाया जाता है। एक एक घंटा पैदल सफर करने को लोग मजबूर हैं। 
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भौंट पंचायत मुख्यालय भले ही सड़क से जुड़ा है, मगर इसके ये तीन गांव और साथ लगती डूमी पंचायत के चार से पांच गांवों के लोग भी सड़क सुविधा न होने से सालों से पैदल ही हर रोज राजधानी आने जाने के लिए कई-कई घंटे तक सफर करने को मजबूर हैं। सबसे अधिक परेशानी मरीजों को लाने और ले जाने में पेश आती है। तंग पगडंडियों से मरीज को उठाकर लाना-ले जाना इन गांव के लोगों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।

बीते दिन चलने में असमर्थ बेबलीधार निवासी हेत राम को गांव के लोगों की मदद से स्ट्रेचर बनाकर अस्पताल पहुंचाया गया। इन दो पंचायतों के सड़क सुविधा से वंचित गांवों को रोड से जोड़ने के लिए करीब सात से आठ किलोमीटर लंबी सड़क का स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों की मांग पर सर्वे भी हुआ है।
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मामला पिछले छह सालों से फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए भेजा गया है, मगर क्लीयरेंस न होने से काम शुरू ही नहीं हो पा रहा है। वहां से क्लीयरेंस आने के बाद ही इसके लिए सरकार बजट प्रावधान हो सकेगा। इन गांव के लोग सुबह पांच बजे घर से पैदल निकलने

के बाद ही राजधानी समय से पहुंच पाते हैं। इन गांव के लोग डूमी सड़क या फिर ऑकलैंड टनल तक पैदल आने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों और इन पंचायतों के प्रतिनिधियों ने सरकार और लोनिवि से मांग की है कि इस सड़क का निर्माण कार्य जल्द शुरू करवाया जाए। 

डूमी से कड़ेची प्रस्तावित सड़क बनने से लाभान्वित होंगे लोग 
भौंट पंचायत प्रधान कृष्ण दत्त, उपप्रधान जितेंद्र, वार्ड पंच संतोष कुमारी और डूमी पंचायत राधा ने कहा ने बताया कि सड़क सुविधा से वंचित इन दोनों पंचायतों के लोगों को मरीजों को सड़क तक पहुंचाने और अपने कृषि उत्पाद, दूध आदि को सड़क तक पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। 

वे स्थानीय विधायक के माध्यम से सरकार और विभाग से सड़क निर्माण जल्द करवाने की मांग उठा चुके हैं, मगर अभी तक फॉरेस्ट क्लीयरेंस न मिलने के कारण मामला लटका हुआ है। कृ ष्ण दत्त ने बताया कि यदि ये गांव सड़क से जुड़ें तो उनका और पूरे गांव का विकास अपने आप रफ्तार पकड़ेगा, लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा और मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी आसान होगा।


फारेस्ट क्लीयरेंस के लिए भेजी फाइल: भट्टी
लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता रवि भट्टी ने बताया कि भौंट - कड़ेची सड़क निर्माण की फाइल वन विभाग को फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए भेजी गई है। अनुमति मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। 

अब फ्लैट दर पर नहीं आएगा पानी का बिल
पानी की कम खपत करने वालों को अब फ्लैट दरों पर बिल नहीं चुकाना होगा। नगर निगम मीटर रीडिंग पर लोगों को पानी के बिल जारी करेगा, इसके लिए शुक्रवार से शहर में मीटर रीडिंग लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। निगम की सैहब सोसायटी के सुपरवाइजरों को मीटर रीडिंग लेने का जिम्मा सौंपा गया है। 

इसी माह से नगर निगम शहर के लोगों को मीटर रीडिंग पर पानी के बिल देगा। नगर निगम ने इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। पहले चरण में पानी के मीटरों की रीडिंग लेकर बेस लाइन डाटा जुटाया जाएगा। इसके बाद फरवरी माह के अंत में बिलिंग के लिए मीटर रीडिंग ली जाएगी। जनवरी और फरवरी की रीडिंग के आधार पर उपभोक्ताओं को पानी के बिल जारी किए जाएंगे।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद पानी की कम खपत करने वालों को कम बिल आएगा जबकि अधिक खपत करने वालों को अधिक बिल चुकाना होगा। शहर के उन परिवारों के लिए यह फायदे का सौदा साबित होगा जो पानी की कम खपत करते हैं। मौजूदा समय में ऐसे परिवारों को भी निगम पानी के फ्लैट बिल जारी कर रहा है।

निगम की ओर से यह अस्थाई व्यवस्था है। स्थाई तौर पर नगर निगम शहर के सभी कनेक्शनों में ऑटोमेटिक मीटर लगाने की तैयारी में है। इसके लिए अमृत मिशन के तहत बजट का भी बंदोबस्त हो गया है। ऑटोमेटिक मीटर लगाने का काम निजी कंपनी को सौंपा जाना है जिसके लिए टेंडर करने की तैयारी है। हालांकि इसमें अभी कुछ महीनों का और समय लग सकता है।

मीटर रीडिंग पर जारी होंगे बिल
जनवरी माह से शहर में पानी के बिल मीटर रीडिंग पर जारी किए जाएंगे। सैहब सोसायटी के सुपरवाइजरों को मीटर रीडिंग जुटाने का काम सौंप दिया गया है। हालांकि जल्द ही अमृत मिशन के तहत शहर के सभी कनेक्शनों पर ऑटोमेटिक मीटर लगा दिए जाएंगे। -पंकज राय आयुक्त, नगर निगम शिमला


23 हजार घरेलू उपभोक्ता, 7 हजार व्यावसायिक
शहर में नगर निगम के करीब 23 हजार घरेलू पेयजल उपभोक्ता हैं, जिनको अभी फ्लैट रेट पर पानी के बिल जारी किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त 7 हजार के करीब व्यावसायिक उपभोक्ताओं को मीटर रीडिंग पर ही पानी के बिल जारी किए जा रहे हैं।

सैहब सुपरवाइजर करेंगे मीटर रीडिंग
शहर में पानी के ऐवरेज बिल जारी करने के पीछे मुख्य कारण नगर निगम के पास मीटर रीडर न होना है। समस्या का समाधान करने के लिए निगम मीटर रीडिंग का काम सैहब सुपरवाइजरों को सौंपने जा रहा है। हालांकि बाद में निगम मीटर रीडरों की भर्ती भी करेगा।
 
बिल जारी करने को नया सॉफ्टवेयर बनेगा
पानी के बिल जारी करने के लिए नगर निगम नया सॉफ्टवेयर बना रहा है। एनआईसी के सहयोग से सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है। मौजूदा सॉफ्टवेयर में खराबी के कारण बिलों में अतिरिक्त सरचार्ज जुड़ने के कारण शहर के लोगों को दिक्कत पेश आ रही हैं।

पानी के रेट का तय होगा नया स्लैब
मीटर रीडिंग पर पानी के बिल जारी होने के बाद नगर निगम पानी का नया स्लैब निर्धारित करेगा। नए स्लैब के हिसाब से नए रेट भी निर्धारित होंगे। पानी की कम खपत के मुकाबले अधिक खपत पर स्लैब की दरें बढ़ती जाएंगी। 0 से 70 लीटर, 70 से 135 लीटर और 135 लीटर से अधिक के तीन स्लैब तय हो सकते हैं।


महज 12 मिनट में सीटीओ से शेरे-पंजाब पहुंचा दमकल वाहन
नगर निगम, अग्निशमन और पुलिस विभाग ने सीटीओ से शेरे-पंजाब तक वीरवार को मॉकड्रिल की। इसमें अग्निश्मन विभाग का सबसे बड़ा वाटर टैंकर (दमकल वाहन) लोअर बाजार से क्रॉस करवाया गया। यह दमकल वाहन केवल 12 मिनट में ही क्रॉस हो गया। पहले इसे करीब 40 मिनट लगते थे। 

वीरवार दोपहर बारह बजकर बारह मिनट पर यह वाहन सीटीओ से चला और बारह बजकर चौबीस मिनट पर शेरे-पंजाब पहुंच गया। रास्ते में कई दुकानदार अपनी दुकानों से बाहर लटकाया सामान हटा रहे थे। यह वाहन 4500 लीटर पानी की क्षमता का है।  फायर ऑफिसर डीसी शर्मा ने कहा कि सीटीओ से शेरे- पंजाब की दूरी 400 मीटर की है।

पहले यहां से गुजरने के लिए दमकल वाहन जगह-जगह फंस जाता था। दुकानों के छज्जे आगे बढ़े होते थे, जिससे ऐसी समस्या सामने आती थी। साल 2014 में कोर्ट के आदेशों के बाद मौजूदा समय तक हर महीने ऐसी मॉकड्रिल करवाई जाती है।  इस अवसर पर सब फायर ऑफिसर राम गोपाल ठाकुर, नगर निगम और पुलिस विभाग अधिकारी उपस्थित रहे।

साल 2014 में कोर्ट ने दिए थे ये आदेश
साल 2014 में हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे कि लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बाजार का रास्ता साफ होना चाहिए ताकि अग्निशमन दमकल वाहन आसानी से क्रास हो सके। 

स्कीइंग के लिए आइये कुफरी और नारकंडा
रोमांच के दीवाने शिमला में स्कीइंग का लुत्फ उठा सकते हैं। हिमाचल पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) ने स्कीइंग के दीवानों के लिए खास पैकेज जारी किया है। बीते दिनों कुफरी और नारकंडा में हुई भारी बर्फबारी के बाद स्कीइंग के लिए उपयुक्त परिस्थितियां बन गई हैं।

राजधानी शिमला से 14 किलोमीटर दूर कुफरी की महासू पीक और 64 किलोमीटर दूर नारकंडा की हाटू पीक पर स्कीइंग का बंदोबस्त किया जा चुका है। पर्यटन निगम ने पैकेज जारी कर नारकंडा व कुफरी में सैलानियों के लिए स्कीइंग का इंतजाम किया है। इस बार खास बात यह है कि स्कीइंग के सारे साजो सामान व ट्रेनरों की व्यवस्था भी पर्यटन विकास निगम की ओर से ही की गई है।

स्कीइंग के इच्छुक लोगों को सिर्फ निगम के होटलों अथवा पूछताछ केंद्रों पर अपनी बुकिंग करवानी होगी। निगम की ओर से ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी दी जा रही है। स्कीइंग के आनंद के साथ मेहमानों को ठहरने व खाने पीने की चिंता करने की भी जरूरत नहीं है। एचपीटीडीसी के होटलों में ही सैलानियों के ठहरने व खाने पीने की व्यवस्था भी की गई है।

स्कीइंग के लिए पैकेज जारी: शर्मा
स्कीइंग के लिए स्पेशल पैकेज जारी कर दिया गया है। पैकेज में स्कीइंग से संबंधित सारे बंदोबस्त पर्यटन विकास निगम अपनी ओर से कर रहा है। -विजय शर्मा महाप्रबंधक , पर्यटन विकास निगम

14 दिनों का बेसिक और एडवांस कोर्स
एचपीटीडीसी की ओर से जारी पैकेज के तहत 14 दिन का बेसिक और 14 ही दिन का एडवांस कोर्स करवाया जा रहा है। इसके अलावा 3, 5 और 7 दिन का शार्ट ड्यूरेशन कोर्स भी करवाया जा रहा है। पैकेज के तहत स्कीइंग के उपकरण, आवास, भोजन और फर्स्ट एड सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है।

इन नंबरों पर की जा सकती है बुकिंग
0177-2652561, 2658302
01782-242430, 242509
ई मेल :- shimla@hptdc.in
narkanda@hptdc.in 

डीडीयू के नए भवन के लेबर रूम में होंगे 4 माड्यूलर टेबल
जोनल अस्पताल डीडीयू के लेबर रूम को माड्यूलर तकनीक से तैयार किया जा रहा है। एनएचएम के तहत करोड़ों रुपये खर्च करके ये टेबल लेबर रूम में लगाए जाएंगे। एनएचएम से आई एक टीम ने अस्पताल के पुराने और नए भवन का सर्वे भी किया है। ऐसे में अब डिलीवरी के दौरान आने वाली महिलाओं को लेबर रूम में किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। 

डीडीयू अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि यह टेबल पूरी तरह एडवांस होगा। टेबल को एडजस्ट करने संबंधी तकनीक भी शामिल होगी। ऐसे में डॉक्टरों व स्टाफ की भी दिक्कत नहीं होगी। अस्पताल में इन टेबल की संख्या चार है। अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सा

अधीक्षक डॉ. रंजना राव का कहना है कि एनएचएम से बजट आया है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में सिविल वर्क पूरा हो गया है। ऐसे में अब मशीनें लगाए जाने का काम बचा है, जो जल्द पूरा हो जाएगा। इसके अलावा अस्पताल में बच्चों के एसएनसीयू में भी एडवांस तकनीक की मशीनरी लगाई जाएगी। डीडीयू के पुराने लेबर रूम में तीन पुराने टेबल हैं। जबकि एक नया टेबल यहां लगाया गया है।
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