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हिमाचल: शिमला से गांधी का था खास रिश्ता, आजादी से पहले 10 बार पहुंचे बापू; अंग्रेजी हुकूमत से हुईं मुलाकातें

Thu, 01 Oct 2026 12:18 PM IST
Ankesh Dogra न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

शिमला का इतिहास सिर्फ ब्रिटिश दौर की इमारतों और पहाड़ी खूबसूरती तक सीमित नहीं है। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के कई महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम भी इस शहर से जुड़े रहे हैं। महात्मा गांधी ने आजादी से पहले शिमला की कुल 10 यात्राएं की थीं। उपलब्ध ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार उनकी यात्राएं 1921, 1931, 1939, 1940, 1945 और 1946 में हुईं। 1939 में उनकी दो यात्राओं का उल्लेख पुराने शिमला रिकॉर्ड में नहीं था, जिसके कारण लंबे समय तक यात्राओं की संख्या आठ बताई जाती रही। बाद में रिकॉर्ड को दुरुस्त कर संख्या 10 की गई।
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बापू के शिमला दौरे क्यों थे खास? - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की 157वीं जयंती मनाई जा रही है। इसी कड़ी में हम आपको महात्मा गांधी और शिमला का क्नेक्शन बताएंगे। बता दें कि आजादी की लड़ाई के इतिहास में शिमला की भूमिका बेहद खास रही है। ब्रिटिश शासन के दौरान यह शहर देश की सत्ता का ग्रीष्मकालीन केंद्र था और इसी वजह से राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम यहां हुए। महात्मा गांधी का भी शिमला से गहरा राजनीतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव रहा। उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक महात्मा गांधी आजादी से पहले 10 बार शिमला आए थे। उनकी ये यात्राएं केवल पहाड़ों में प्रवास तक सीमित नहीं थीं। कई मौकों पर गांधी ने ब्रिटिश वायसराय से मुलाकात की और भारत की राजनीतिक स्थिति, स्वतंत्रता आंदोलन, युद्ध तथा देश के भविष्य जैसे मुद्दों पर बातचीत की।
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पहली बार 1921 में शिमला पहुंचे थे गांधी
महात्मा गांधी की शिमला की पहली यात्रा 12 मई 1921 से 17 मई 1921 के बीच हुई थी। इस दौरान उन्होंने तत्कालीन वायसराय लॉर्ड रीडिंग से मुलाकात की थी। ऐतिहासिक विवरणों में उनकी इस यात्रा के दौरान शिमला में जनसभाओं और स्थानीय लोगों से संपर्क का भी उल्लेख मिलता है। पहली यात्रा के दौरान गांधी के ठहरने को लेकर उपलब्ध हिमाचली संदर्भों में शांति कुटीर, समरहिल का उल्लेख मिलता है।

1931 में तीन बार आया बापू का शिमला दौरा
1931 में गांधी ने शिमला की तीन यात्राएं कीं। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार ये यात्राएं 13 से 17 मई, 15 से 22 जुलाई और 25 से 27 अगस्त 1931 के बीच हुईं। इन दौरों में ब्रिटिश सरकार के साथ भारत के राजनीतिक भविष्य और तत्कालीन राष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत का सिलसिला चला। यह वह दौर था जब स्वतंत्रता आंदोलन और ब्रिटिश सरकार के बीच राजनीतिक वार्ता भी चल रही थी।
 

1939 की दो यात्राएं लंबे समय तक रिकॉर्ड से गायब रहीं
गांधी की शिमला यात्राओं का सबसे दिलचस्प तथ्य 1939 की दो यात्राओं से जुड़ा है। उपलब्ध संशोधित रिकॉर्ड के अनुसार गांधी 4 से 5 सितंबर 1939 और फिर 26 से 27 सितंबर 1939 को शिमला आए थे। ये यात्राएं द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत के दौर में हुईं और वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो से मुलाकात से जुड़ी थीं।

इन दोनों यात्राओं का पुराने शिमला रिकॉर्ड और रिज मैदान पर लगी पट्टिकाओं में उल्लेख नहीं था। इसी वजह से लंबे समय तक गांधी की शिमला यात्राओं की संख्या आठ बताई जाती रही। बाद में ऐतिहासिक तथ्यों की जांच के बाद दोनों यात्राओं को रिकॉर्ड में शामिल किया गया और संख्या 10 हो गई।

1940 में भी दो बार शिमला आए
गांधी ने 1940 में भी शिमला की दो यात्राएं कीं। रिकॉर्ड के अनुसार पहली यात्रा 29 जून 1940 को और दूसरी 27 से 30 सितंबर 1940 के बीच हुई। इन दौरों के दौरान द्वितीय विश्वयुद्ध और भारत की राजनीतिक स्थिति प्रमुख मुद्दों में शामिल थी। वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो के साथ बातचीत में युद्ध और भारत के भविष्य को लेकर गांधी का पक्ष महत्वपूर्ण रहा।

1945 की शिमला यात्रा और वेवल योजना
गांधी की अगली महत्वपूर्ण शिमला यात्रा 24 जून से 16 जुलाई 1945 के बीच हुई। यह वह समय था जब वायसराय लॉर्ड वेवल भारत की राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव को लेकर भारतीय नेताओं से बातचीत कर रहे थे।

इसी दौरान शिमला में वह राजनीतिक सम्मेलन हुआ जिसे इतिहास में शिमला सम्मेलन या वेवल सम्मेलन के नाम से जाना जाता है। गांधी इस प्रक्रिया में औपचारिक वार्ताकार के तौर पर नहीं, बल्कि सलाहकार की भूमिका में मौजूद थे। उपलब्ध ऐतिहासिक सामग्री के अनुसार वह वायसराय के आमंत्रण पर शिमला पहुंचे थे।

1946 में कैबिनेट मिशन के दौरान शिमला पहुंचे
गांधी की शिमला की अंतिम यात्रा 2 मई से 14 मई 1946 के बीच हुई। यह यात्रा कैबिनेट मिशन के भारत आने के दौर से जुड़ी थी। यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य को स्पष्ट करना जरूरी है। गांधी कैबिनेट मिशन के औपचारिक सदस्य नहीं थे। मौलाना अबुल कलाम आजाद ने अपनी पुस्तक 'India Wins Freedom' में लिखा है कि मिशन ने गांधी को शिमला बुलाया था ताकि वह परामर्श के लिए उपलब्ध रहें। आजाद के अनुसार गांधी मैनर विला में ठहरे थे और वहां कांग्रेस कार्यसमिति की अनौपचारिक बैठकों में भी उनसे विचार-विमर्श होता था। जवाहरलाल नेहरू के उस समय के पत्राचार में भी 2 मई 1946 को शिमला पहुंचने और वहां रहने का रिकॉर्ड मिलता है।

मैनर विला से भी जुड़ी गांधी की यादें
शिमला में गांधी के प्रवास का एक महत्वपूर्ण स्थान मैनर विला भी रहा। यह राजकुमारी अमृत कौर से जुड़ा भवन था। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार 1935 के बाद गांधी के शिमला प्रवास के दौरान यह उनके प्रमुख ठहराव स्थलों में शामिल रहा। 1945 और 1946 के उनके शिमला प्रवास से मैनर विला का संबंध ऐतिहासिक स्रोतों में मिलता है। मौलाना आजाद के विवरण में 1946 की यात्रा के दौरान गांधी के मैनर विला में ठहरने की स्पष्ट जानकारी मिलती है। इसके अलावा हिमाचल पर्यटन विभाग के एक आधिकारिक लेख के अनुसार गांधी 1946 में कैबिनेट मिशन के दौरान चैडविक हाउस में भी ठहरे थे। इसलिए उनके शिमला प्रवास से जुड़े अलग-अलग ठहराव स्थलों को एक ही स्थान तक सीमित करना उचित नहीं होगा।

गांधी की शिमला यात्राओं का सही आंकड़ा क्या है?
संशोधित ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार गांधी की 10 यात्राएं इस प्रकार दर्ज हैं:
  • 12-17 मई 1921
  • 13-17 मई 1931
  • 15-22 जुलाई 1931
  • 25-27 अगस्त 1931
  • 4-5 सितंबर 1939
  • 26-27 सितंबर 1939
  • 29 जून 1940
  • 27-30 सितंबर 1940
  • 24 जून-16 जुलाई 1945
  • 2-14 मई 1946
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इन तारीखों को जोड़ने पर कुल 10 शिमला यात्राएं होती हैं। 1939 की दोनों यात्राओं को पुराने रिकॉर्ड में शामिल नहीं किए जाने के कारण लंबे समय तक संख्या आठ बताई जाती रही थी।
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