आठ बजे तक कालीबाड़ी मंदिर, मिडल बाजार, विकासनगर, पंथाघाटी, बड़ागांव, मल्याना, ढली और घणाहट्टी के शिव मंदिर चौंरीधार में लोगों ने कतारों में खड़े होकर बाबा भोलेनाथ के दर्शन किए तथा पूजा अर्चना की। सभी मंदिरों में शाम पांच बजे तक यही स्थिति बनी रही।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में मंगलवार को महाशिवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया गया। सुबह सात बजे तक शहर के अधिकांश शिवालयों के कपाट दर्शनों के लिए खोल दिए थे। शिव के रुद्राभिषेक करने के लिए लोग हाथों में जल का लोटा और दूध लेकर कतारों में खड़े रहे। आठ बजे तक कालीबाड़ी मंदिर, मिडल बाजार, विकासनगर, पंथाघाटी, बड़ागांव, मल्याना, ढली और घणाहट्टी के शिव मंदिर चौंरीधार में लोगों ने कतारों में खड़े होकर बाबा भोलेनाथ के दर्शन किए तथा पूजा अर्चना की। सभी मंदिरों में शाम पांच बजे तक यही स्थिति बनी रही। स्थानीय व्यक्ति प्रेम और दयाराम ने बताया कि मंदिर में आए भक्तों के लिए पकौड़े तथा अन्य प्रसाद की व्यवस्था की गई थी। इस दौरान मंदिरों में दिनभर मेरा भोला है भंडारी करे नंदी की सवारी... शिव कैलाशों के वासी भजनों पर लोग नाचते रहे। शहर के मंदिरों को फूलों व बिल्व पत्रों से सजाया गया था। इसके अलावा मंदिरों के बाहर बिल्व पत्र और फल भी बेचे जा रहे थे।
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वहीं, राधा-कृष्ण गंज मंदिर से भगवान शिव की ब रात निकाली गई। बरात में शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज शामिल हुए। मंत्री ने भगवान शिव की पालकी को कंधा भी दिया। महिला तथा पुरुष भजन कीर्तनों और ढोल की थाप पर नाचे। दोपहर बाद यह बरात राम मंदिर पहुंची। इस दौरान बरात में शामिल भक्तों ने केदारनाथ धाम के दर्शन भी किए। राम मंदिर की ओर से शिव विवाह कार्यक्रम के आयोजक संजय सूद और सुनंदा ने यह जानकारी दी। बताया कि 2 मार्च को सुबह 10 बजे माता पार्वती की विदाई होगी।
घोटा पीने के लिए मची रही होड़
शेरे पंजाब, लिफ्ट शिवालय, ओल्ड बस स्टैंड के पास स्थानीय कारोबारियों तथा लोगों ने पकौड़े तथा भंडारे की व्यवस्था की थी। भगवान शिव का प्रसाद पाने के लिए युवाओं में होड़ मची रही। कुछ लोग गिलासों और कुछ बोतलें लेकर लाइनों में खड़े नजर आए। इसके अलावा मिडल बाजार में लोगों के लिए कड़ी-चावल का भंडारा भी लगाया गया था।
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गाय के थनों से गिरता था दूध
घणाहट्टी स्थित शिव मंदिर चौंरीधार काफी पुराना मंदिर है। मंदिर के पुजारी शिव कुमार ने बताया कि बहुत सालों पहले यहां पर एक गाय आती थी। इस दौरान उसके थनों से अपने आप दूध निकलना शुरू हो जाता था। इसकी जानकारी स्थानीय लोगों ने धामी रियासत की राजमाता को दी थी। यहां पर जब मिट्टी की खुदाई की गई तो शिव की पिंडी निकली। इसके बाद मंदिर का निर्माण किया गया। तब से लेकर अब तक महाशिवरात्रि पर्व धूमधाम से मनाया जाता है।