बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के सरकार के दावों की पोल सूबे के दर्जनों अस्पताल खोल रहे हैं। कई अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं है। जहां मशीन है, वहां रेडियोलॉजिस्ट ही नहीं है। कई अस्पतालों में सालों से मशीनें खराब पड़ी हैं। कुछ अस्पतालों में तो दो से तीन साल से पद खाली चल रहे हैं।
इससे सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीज निजी क्लीनिकों में लुटने को मजबूर हैं। अल्ट्रासाउंड करवाने लिए खासकर गर्भवती महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सरकारी अस्पतालों में सुविधा न होने से निजी क्लीनिकों में 700 से 1500 रुपये चुकाकर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है।
इधर, प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री एमडी कर रहे चिकित्सकों के पास आउट होने पर रेडियोलॉजिस्टों की तैनाती का तर्क दे रहे हैं। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. राजीव सहजल का कहना है कि विशेषज्ञ डॉक्टर सीमित ही हैं। उन्होंनेे कहा कि सरकार की कोशिश रहेगी कि रिक्त पदों को जल्द भरा जाए और जहां मशीनें खराब हैं। उन्हें ठीक करवाया जाएगा।
आठ जिलों में अस्पतालों का हाल
ऊना : जिले में चार जगहों पर रेडियोलॉजिस्ट के पद खाली चल रहे हैं। क्षेत्रीय अस्पताल सहित गगरेट और अंब अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के पद खाली हैं। दौलतपुर चौक अस्पताल में अल्ट्रासाउंडमशीन ही खराब है।
हमीरपुर : बड़सर और भोरंज में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल रही है।
कांगड़ा : नूरपुर, भवारना, देहरा, कांगड़ा, ज्वाली, इंदौरा, फतेहपुर में भी अल्ट्रासाउंडनहीं हो रहे हैं।
कुल्लु: जरी और मनाली में लोग इस सुविधा से वंचित हैं।
सोलन: नालागढ़ अस्पताल में भी अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं।
बिलासपुर: जिला अस्पताल सहित घुमारवीं में मशीनें तो हैं लेकिन रेडियोलॉजिस्ट नहीं हैं।
चंबा : जिले के तीसा, पांगी, भटियात, भरमौर में अब तक अल्ट्रासाउंडसुविधा नहीं।
सिरमौर : राजगढ़, सराहां, ददाहू, शिलाई और पांवटा साहिब के लोगों अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल रही है। प्रदेश सरकार पिछले लंबे समय से रेडियोलॉजिस्ट के खाली चल रहे पदों पर डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं कर पाई है।