शहर की सफाई के लिए इटली से खरीदी करोड़ों की स्वीपिंग मशीनें फेल
वर्ष 2020 में 4.60 करोड़ रुपये में खरीदी थीं दो स्वीपिंग मशीनें, सफाई में रहीं फेल तीसरी मशीन को डंपर ट्रक में बदला
एक टुटीकंडी में खा रही जंग, दूसरी पर हर माह सवा लाख खर्च अमर उजाला ब्यूरो शिमला। राजधानी शिमला को करोड़ों रुपये की हाईटेक स्वीपिंग मशीनों से साफ-सुथरा बनाने का नगर निगम का फार्मूला फेल हो गया है। इटली से खरीदी यह मशीनें अब सफाई से ज्यादा नगर निगम की जेब पर बोझ बन गई हैं। हालात यह हैं कि महज छह साल के भीतर निगम प्रशासन को इन्हें बदलने का फैसला लेना पड़ा है।
नगर निगम अब इन मशीनों को नई मशीनों से रिप्लेस (बदलने) करने की तैयारी में है। इसके लिए कंपनी से बातचीत चल रही है और प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है। फिलहाल एक स्वीपिंग मशीन पिछले एक वर्ष से टुटीकंडी पार्किंग में खड़ी-खड़ी जंग खा रही है, जबकि दूसरी मशीन केवल रिज और मालरोड की सफाई में ही इस्तेमाल हो रही है। इस पर हर महीने करीब सवा लाख रुपये का खर्च आ रहा है। एक मशीन पर प्रतिमाह करीब 30 हजार रुपये ईंधन पर खर्च होते हैं। इसके अलावा ब्रश बदलने और रखरखाव पर 30 से 50 हजार रुपये तक अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। मशीनों के संचालन के लिए चालक के साथ एक परिचालक भी तैनात करना पड़ता है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि खराबी आने पर इनके स्पेयर पार्ट और तकनीकी विशेषज्ञ विदेश से बुलाने पड़ते हैं, जिसके लिए पहले से भुगतान करना होता है। ऐसे में इन मशीनों का संचालन नगर निगम के लिए लगातार घाटे का सौदा साबित हो रहा है। नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा ने बताया कि मौजूदा मशीनों को नई मशीनों से बदलने की योजना तैयार की जा रही है। इसके लिए प्रस्ताव पर काम चल रहा है।
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शुरुआत से ही विवादों में रही खरीद
नगर निगम ने स्मार्ट सिटी मिशन के तहत वर्ष 2020 में 4.60 करोड़ रुपये की लागत से इटली से दो हाईटेक स्वीपिंग मशीनें खरीदी थीं। दावा किया था कि यह मशीनें रिज और मालरोड के अलावा शहर के बाजारों और उपनगरों की सफाई भी कुछ ही मिनटों में कर देंगी।गाड़ीनुमा इन मशीनों में नीचे लगे तीन ब्रश और वैक्यूम सिस्टम के जरिये कचरा उठाने की व्यवस्था है, लेकिन शिमला पहुंचते ही ये मशीनें अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकीं। बाजारों की तंग सड़कों के कारण इन्हें केवल रिज और मालरोड तक सीमित करना पड़ा। बरसात के दौरान गीली सड़कों से कचरा उठाने में भी यह मशीनें नाकाम रहीं। खरीद के समय कांग्रेस ने भी इस सौदे पर सवाल उठाए थे और जांच की मांग की थी। हालांकि, बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
इनसेट
तीसरी मशीन को बना दिया डंपर
ट्रक स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत खरीदी दो मशीनों के अलावा नगर निगम को पावरग्रिड के सीएसआर प्रोजेक्ट के तहत करीब 45 लाख रुपये की एक और स्वीपिंग मशीन भी मिली थी। शुरुआत में दावा किया था कि यह मशीन इटली से लाई गई मशीनों से भी अधिक प्रभावी है और गीली सड़कों से भी आसानी से कचरा उठा सकती है। हालांकि, कुछ समय बाद यह मशीन भी अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी। अब नगर निगम ने इसे संशोधित कर कूड़ा ढोने वाले डंपर ट्रक में बदल दिया है।