छिन्नमस्तिका जयंती के अवसर पर पुजारी वर्ग की ओर से बीते शुक्रवार से सुबह 24 घंटे का महायज्ञ की पूर्णाहुति शुक्रवार सुबह बजे डाली गई। इस मौके पर माता रानी को 56 प्रकार के भोग लगाए गए और सुख समृद्धि की कामना की गई।
हिमाचल प्रदेश के शक्तिपीठ चिंतपूर्णी में मां छिन्नमस्तिका जयंती मनाने के लिए शुक्रवार को करीब 10 हजार श्रद्धालु पहुंचे। छिन्नमस्तिका जयंती के अवसर पर पुजारी वर्ग की ओर से बीते शुक्रवार से सुबह 24 घंटे का महायज्ञ की पूर्णाहुति शुक्रवार सुबह बजे डाली गई। इस मौके पर माता रानी को 56 प्रकार के भोग लगाए गए और सुख समृद्धि की कामना की गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने चिंतपूर्णी मंदिर पहुंचकर माता की पावन पिंडी के दर्शन किए और मंदिर में चल रहे हवन में पूर्ण आहुति भी डाली। मंदिर न्यास के लंगर में पहाड़ी धाम का आयोजन किया गया।
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छिन्नमस्तिका जयंती के उपलक्ष्य में मां के मंदिर को रंग-बिरंगे फूलों से दुल्हन की तरह सजाया गया। शुक्रवार शाम छह बजे तक करीब दस हजार श्रद्धालु मां के दरबार में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा चुके थे। हालांकि, अपेक्षा के अनुसार शुक्रवार को भीड़ नहीं उमड़ी और श्रद्धालुओं की दर्शन की कतारें पुराने बस अड्डे के आसपास ही रहीं। ऐसे में मां के दर्शनों के लिए भक्तों को अपनी बारी के लिए लंबी प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ी।
श्रद्धालुओं ने भी पावन पिंडी के दर्शन करते हुए मां के दरबार में शीश नवाया। पुजारी वर्ग ने विश्व शांति और जनकल्याण के लिए मंदिर में पूजा-अर्चना की। सुबह मंत्रोच्चारण के बीच महायज्ञ की पूर्णाहुति डाली गई और सर्वत्र कल्याण की प्रार्थना मां के दरबार में की गई। मंदिर आयुक्त व जिला उपायुक्त राघव शर्मा ने माता चिंतपूर्णी की जयंती के उपलक्ष्य पर सभी भक्तों को शुभकामनाएं भी दीं। कहा कि उनकी माता चिंतपूर्णी से यही प्रार्थना है कि माता का आशीर्वाद सदैव अपने भक्तों पर रहे। उनके जीवन में खुशहाली बनी रहे।