खाने का रेट महज पांच रुपये ही रखा गया है। खर्चा इससे कहीं अधिक आता है। संजय सिंगला ने बताया कि मजदूरों के आत्म-सम्मान के लिए यह राशि रखी गई है। यहां खाना खाकर कोई यह नहीं कह सकेगा कि यहां मुफ्त में खाना खाकर जा रहे हो। मजदूर भी कह सकते हैं कि वह पैसे देकर खाना खा रहे हैं।
कहां पर है कैंटीन
औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में त्रिलोकपुर सड़क के समीप ही भीतर के मार्ग पर यह कैंटीन चल रही है। फार्मा उद्योग चलाने वाले संजय सिंगला इसका संचालन कर रहे हैं। कई बार वह स्वयं भी यहां खाना परोसने आ जाते हैं। मजदूर अपनी थालियां लेकर स्वयं आते हैं। यहां लाइनों में खड़ा होकर पांच रुपये देते हैं और खाना ले लेते हैं। कई लोग टिफिन भरकर भी घर ले जाते हैं।