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जाखू की चोटी पर रुके थे भगवान हनुमान

Thu, 20 Mar 2014 01:20 PM IST
अशोक चौहान/अमर उजाला, शिमला
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हिल्स क्वीन शिमला का ऐतिहासिक जाखू मंदिर। आज जिस स्थान पर मंदिर बना है वहां कभी भगवान हनुमान ने विश्राम किया था। मान्यता है कि जैसे ही हनुमान जी ने इस चोटी पर अपना कदम रखा था तो यह पहाड़ी उनके भार से आधी धंस गई थी। बाद में यहां तपस्या कर रहे एक ऋषि ने उनका मंदिर बना दिया।
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कहा जाता है कि यह प्रसिद्घ मंदिर रामायण के समय का बना हुआ है। लंका में भगवान राम और रावण के बीच भीषण युद्घ चल रहा था। इसी दौरान लड़ाई में राम के छोटे भाई लक्ष्मण जख्मी हो गए। मेघनाद के प्रहार से लक्ष्मण अचेत हो गए।

बाद में एक वैद्य ने इनका ईलाज शुरू किया। वैद्य ने बताया कि हिमालय पर स्थित जड़ी बूटियों से ही लक्ष्मण ठीक हो पाएंगे। ऐसे में ये बूटियां लाने का काम हनुमान जी को सौंपा गया।
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जाखू पर उतरे भगवान हनुमान

भगवान हनुमान भी हिमालय की ओर चल दिए। अपनी यात्रा के दौरान जड़ी बूटियों की तलाश में वह जाखू चोटी के उपर से गुजरने लगे। यहां एक ऋषि उन्हें तपस्या करता हुआ दिखाई दिया।

जड़ी बूटियों की जानकारी लेने के लिए हनुमान जी जाखू चोटी पर उतर गए। लेकिन इनका भार इतना ज्यादा था कि चोटी आधी धंस गई। बाद में हनुमान जी ने ऋषि से हिमालय में पाई जाने वाली संजीवनी बूटी की जानकारी ली और वचन दिया कि वह वापस लौटते समय जरूर उनसे मिलेंगे।

इसके बाद हनुमान जी यहां से हिमालय की ओर चल दिए। कहा जाता है कि हनुमान जी वापस लंका जाते वक्त यहां से तो नहीं गुजरे लेकिन उनकी एक मृर्ति यहां प्रकट हुई जिसके बाद इस ऋषि ने उनका एक छोटा सा मंदिर बना दिया।

सैलानियों के लिए बनी मनपसंद जगह

जाखू का यह मंदिर आज शिमला आने वाले सैलानियों के लिए मनपसंद जगह बना हुआ है। अब यहां पर हनुमान जी की 108 फीट ऊंची मूर्ति भी लगाई गई है।

यह रिज मैदान के साथ साथ शिमला के आसपास के इलाकों से देखी जा सकती है। हर साल लाखों सैलानी भगवान हनुमान से आर्शीवाद लेने के लिए जाखू मंदिर पहुंचते हैं।
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