जयराम सरकार में ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा यहां तक कह चुके हैं कि वीरभद्र ने भी टिकट पर उनकी सलाह नहीं मानी थी, जिस कारण प्रतिभा सिंह को हारना पड़ा। इस बार भी आश्रय को टिकट नहीं दिया तो भाजपा की राह आसान नहीं होगी।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो वीरभद्र सिंह मंडी सीट पर इन दिनों चल रही सियासत को बारीकी से देख रहे हैं। वर्तमान में वीरभद्र हिमाचल की राजनीति के सबसे बड़े खिलाड़ी माने जाते हैं। इसलिए उनके अगले सियासी दांव पर दोनों दलों के नेताओं की निगाहें टिकी हैं।
वीरभद्र-प्रतिभा रह चुके हैं सांसद
वीरभद्र सिंह के अलावा उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह भी मंडी से सांसद रह चुकी हैं। मंडी से कुछ पार्टी कार्यकर्ता तो उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह को चुनाव में उतारने की वकालत कर चुके हैं, लेकिन वीरभद्र सिंह इस पर भी चुप्पी साधे हुए हैं। उधर, स्क्रीनिंग कमेटी के लिए मंडी सीट से पैनल में दो दावेदारों के नाम चुनना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।