हिमाचल प्रदेश में जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव और विधानसभा उपचुनाव की तिथि नजदीक आ रही है, भाजपा- कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और प्रत्याशियों में भितरघात का डर सता रहा है। हालांकि, दोनों पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं ने असंतुष्टों को मनाने में कुछ हद तक कामयाबी हासिल कर ली है, लेकिन रूठों के मन में टीस अभी भी है। नेता तो मान गए, लेकिन अब समर्थकों से भितरघात का दोनों दलों को डर सता रहा है। कुछेक ने पार्टी के फैसले को दरकिनार कर निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया तो उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। संगठन के कुछ पदाधिकारियों में टिकट आवंटन को लेकर नाराजगी है। भाजपा नेताओं ने तो खुलकर भी बातें कहीं कि संगठन का झंडा उठाने और सालों से पार्टी के साथ जुड़े पदाधिकारियों को नजरअंदाज कर दूसरे संगठन से आए लोगों को प्रत्याशी बनाया गया। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने रूठों को मनाया और तरह-तरह के मन लुभावने सपने दिखाए।