सांसद शांता कुमार ने कहा कि जब वे अध्यापक थे, सिर गर्व से ऊंचा था। अब नेता होने पर सिर शर्म से झुक जाता है। बड़े लोग गरीब को लूट रहे हैं। अगर इस कृत्य को आज विवेकानंद देखते तो रो पड़ते। देश में नक्सलवादी पांच से छह प्रतिशत हैं।
बाकी भूख से मजबूर होकर नक्सलवादी बने। घुसपैठिये देश में घुसे और एमएलए तक बन गए, इससे बड़ा राजनीतिक अवमूल्यन नहीं हो सकता। शांता धर्मशाला सामुदायिक भवन में हिमाचल विचार मंच की ओर से वर्तमान लोकसभा चुनाव व देश के समक्ष चुनौतियां विषय पर विचार गोष्ठी में बोल रहे थे।
शांता कुमार ने कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता कहा कि राजनीति का अवमूल्यन देश के समक्ष सबसे बड़ा संकट है। चुनावी दंगल के बीच धर्मशाला में लोकतंत्र की मजबूती के लिए शहर के बुद्धिजीवियों ने इस कार्यक्रम में मंथन किया।
शांता कुमार ने कहा कि लोकतंत्र में मिला वोट का अधिकार शहीदों की अमानत है। वर्तमान में राजनीति का अवमूल्यन सारी सीमाएं लांघ गया है। ऐसे में देश नहीं चल सकता है। संसद के मंदिर में भ्रष्टाचारी नेताओं के आने से मर्यादाएं तार-तार हो रही हैं।
नेताओं के भ्रष्टाचार के मामलों को निपटाने के लिए स्पेशल कोर्ट बनाना पड़ा, इससे बड़ी शर्म की कोई और बात नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि सवा सौ साल पहले विद्वानों ने कहना शुरू कर दिया था कि अंग्रेज देश के लिए वरदान हैं।
लेकिन, स्वामी विवेकानंद ने गरीब व्यक्ति को देवता का दर्जा दिया। कार्यक्रम में केंद्रीय विवि के वीसी कुलदीप अग्निहोत्री, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त केसी शर्मा, भाजपा नेता संजय शर्मा, राकेश शर्मा सहित कई लोग मौजूद रहे।