संसदीय क्षेत्र मंडी में इस बार जंग कांग्रेस और भाजपा से ज्यादा जयराम और सुखराम के बीच मानी जा रही है। सियासी समीकरण उलझे हुए हैं। पहली बार मंडी से सीएम की कुर्सी तक पहुंचे जयराम ठाकुर की प्रतिष्ठा यहां दाव पर है और सीएम खुद भाजपा प्रत्याशी रामस्वरूप के प्रचार की कमान संभाले हुए हैं।
यही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद चुनावी रैली कर वोटरों की नब्ज टटोलते हुए मंडी संसदीय क्षेत्र के साथ दिल से जुड़े होने का इमोशनल कार्ड खेल रहे हैं। मंडी में कभी राजनीति की धुरी रहे पंडित सुखराम और उनके पोते आश्रय को अब तक के कैंपेन में वीरभद्र का पूरा साथ नहीं मिला है।
वीरभद्र सिंह के रुख पर भी सबकी निगाहें हैं, क्योंकि वह मौका मिलने पर सुखराम परिवार पर निशाना साधने का मौका भी नहीं चूक रहे हैं। अपने पुराने कार्यों को लेकर सुखराम परिवार ने चुनावी फील्ड सजाई है।
कांग्रेस प्रत्याशी के पिता अनिल शर्मा को छोड़ सत्तारूढ़ भाजपा को 17 विधानसभा क्षेत्रों में 13 विधायकों का साथ है। कांग्रेस सुखराम परिवार के सहारे वापसी का प्रयास कर रही है। लेकिन इस सब के बीच तीसरे दलों और बागियों का रोल भी अहम रहेगा।
सड़कों की हालत, बेरोजगारी, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं, मंडी में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, कीरतपुर-मंडी-मनाली फोरलेन, जिला मंडी को पर्यटन की दृष्टि से विकास कर स्वरोजगार के साधन जैसे मुद्दे शामिल हैं।
इसके साथ ही द्रंग में नमक की खान में उत्पादन, पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेललाइन का विस्तार, भूभू जोत टनल का निर्माण, फोरलेन प्रभावितों की मुआवजे संबंधित मांगे के साथ साथ महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, नोटबंदी, जीएसटी जैसे मुद्दे भी जीवंत हैं।
रामस्वरूप शर्मा का कहना है कि सुखराम ने सिर्फ परिवार का सोचा है। मंडी को मंडी बनाकर रख दिया था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोग से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंडी को छोटी काशी का रूप दिया है।
स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, सड़क, पर्यटन हर क्षेत्र में मंडी का विकास हुआ है। विकास कार्यों के दम पर वह चुनाव तो जीत चुके हैं, लेकिन इस बार लड़ाई सबसे अधिक मार्जिन की है।
बड़ी काशी के सांसद यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद छोटी काशी के सांसद को मंडी पहुुंचकर आशीर्वाद दे चुके हैं। एक सुदामा के मंडी संसदीय क्षेत्र के लिए इससे बड़ी बात क्या होगी। इन चुनावों के बाद सुखराम परिवार की पॉलिटिकल कॅरिअर की डेथ तय है।
आश्रय शर्मा का कहना है कि वह चुनाव जीतेंगे। कांग्रेस आलाकमान ने टिकट देकर जो विश्वास उन पर जताया है, वह उसे पूरा करेंगे। पांच सालों में सांसद रामस्वरूप अपने संसदीय क्षेत्र से ही गायब रहे।
लोग उन्हें ढूंढ रहे हैं। लोगों में भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ काफी रोष है। उनकी जीत तय है। क्योंकि उन्हें वीरभद्र सिंह और पंडित सुखराम का साथ है। दोनों हिमाचल के लिए विकास के मसीहा हैं।
पंडित सुखराम ने कई परिवारों के घरों को रोजगार दिया है। जबकि देश भर में दूर संचार क्रांति लाने में अहम भूमिका निभाई है। अपनी युवा सोच और दादा एवं कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के दम पर वह जीतेंगे।