फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मंडी-शिमला सीट पर सीएम तो कांगड़ा में शांता की प्रतिष्ठा दांव पर

Sun, 24 Mar 2019 01:52 PM IST
अरविन्द ठाकुर अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन

भाजपा प्रत्याशियों की घोषणा होते ही मंडी और शिमला संसदीय सीट पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और कांगड़ा में पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद शांता कुमार की प्रतिष्ठा दांव पर लग गई है। मुख्यमंत्री की पैरवी के बाद ही भाजपा हाईकमान ने मंडी में टिकट नहीं बदला है।

विज्ञापन


शिमला से सुरेश कश्यप को भी मुख्यमंत्री के करीबी होने का लाभ मिला है। इन दोनों प्रत्याशियों को जितवाना अब मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। साल 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में सुजानपुर सीट पर हार का सामना कर चुके पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल को एक बार फिर अपना खोया हुआ रुतबा वापस लेने का अवसर मिल गया है।

जिला हमीरपुर में अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए प्रो. धूमल को अपने बेटे सांसद अनुराग ठाकुर के लिए बड़ी जीत की जरूरत है। हमीरपुर संसदीय सीट पर भीतरघात को रोकना भी भाजपा के लिए चुनौती भरा काम रहेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

कांगड़ा-चंबा संसदीय सीट से चुनाव लड़ने से इंकार करने के बाद सांसद शांता कुमार ने अपने खासमखास हिमाचल सरकार में मंत्री किशन कपूर को टिकट दिलवा कर अप्रत्यक्ष तौर पर खुद भी चुनाव मैदान में एंट्री मार ली है। गद्दी समुदाय से संबंधित मंत्री किशन कपूर के लिए कांगड़ा-चंबा में माहौल बनाने के लिए शांता कुमार को खुद प्रचार की कमान संभालनी होगी।

सभी मंत्रियों को एक साथ लेकर चलना होगा। सरकार में पद नहीं मिलने से नाराज चल रहे विधायकों और विधानसभा चुनाव में हारे भाजपा प्रत्याशियों को भी एकजुट करना होगा। शांता कुमार की सिफारिश पर ही किशन कपूर को टिकट मिला है। उधर शिमला संसदीय सीट पर भाजपा ने मौजूदा सांसद वीरेंद्र कश्यप की टिकट काट कर सिरमौर के पच्छाद से विधायक सुरेश कश्यप को चुनाव मैदान में उतारा है।

मुख्यमंत्री की हामी के बाद ही हाईकमान ने सोलन से संबंधित वीरेंद्र कश्यप का टिकट काट कर सिरमौर से नया प्रत्याशी उतारा है। ऐसे में शिमला और सोलन जिला से प्रत्याशी नहीं होने के चलते अब भाजपा को इन दोनों जिलों में ज्यादा मेहनत करनी पडे़गी। शिमला संसदीय सीट पर मुख्यमंत्री के साथ-साथ शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज, मुख्य सचेतक नरेंद्र बरागटा और सहकारिता मंत्री राजीव सैजल की प्रतिष्ठा भी दांव पर लग गई है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें