हालांकि, उन्हें टिकट दिलाने के लिए कांग्रेस के सभी खेमे सहमत माने जा रहे हैं। दूसरी ओर वीरभद्र सिंह के ही नजदीकी कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ऊना जिले के हरोली से विधायक हैं।
उनकी अपने हलके में अच्छी पकड़ बेशक हो, लेकिन उन पर ऊना जिले की पांचों सीटों पर बढ़त दिलाने का दबाव होगा। हमीरपुर जिले के नादौन के कांग्रेस विधायक सुखविंद्र सिंह सुक्खू पिछले छह साल तक कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष रहे जोकि एक लंबा कार्यकाल था।
टिकट के लिए अग्निहोत्री की तरह ही सुक्खू का भी नाम चल रहा था, लेकिन कांग्रेस हाईकमान ने अनुराग ठाकुर के गृह जिले हमीरपुर से ही उम्मीदवार देना उचित नहीं समझा। राहुल गांधी के भरोसेमंद रहे सुक्खू के लिए अनुराग ठाकुर को घर में ही मात देना आसान नहीं होगा।
तीन बार लगातार सांसद रहे लोकसभा में मुख्य सचेतक अनुराग ठाकुर को भाजपा हाईकमान ने लगातार चौथी बार उम्मीदवार बनाकर कांग्रेस को इतना चिंतित किया कि लंबी माथापच्ची के बाद आखिर में विधायक रामलाल ठाकुर पर ही सहमति बनानी पड़ी जो तीन बार इसी सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार रह चुके हैं।
वह हर बार सीट तो खो गए, लेकिन उनके पास चुनाव लड़ने का अनुभव है। हमीरपुर सीट से ही तीन बार के पूर्व भाजपा सांसद सुरेश चंदेल पर भाजपा और कांग्रेस दोनों में रस्साकशी चली हुई है।
सुरेश चंदेल भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य हैं। वह पहले भाजपा तो बाद में कांग्रेस से टिकट चाह रहे थे जो उन्हें कहीं से नहीं मिला। वह भाजपा में ही बने रहेंगे या कांग्रेस में जाएंगे, उन्होंने इस पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं।
ऐसे में भाजपा उन्हें अपने साथ बनाए रखना चाहती है तो कांग्रेस अपने में शामिल करवाना चाहती है। दोनों इसमें अपना घाटा-नफा देख रहे हैं। अगर चंदेल ने निर्दलीय चुनाव लड़ा तो भी वह दोनों ओर के समीकरण बिगाड़ सकते हैं।