दरअसल, ये सातों अधिकारी अन्य तहसीलों में तहसीलदारों की ही तर्ज पर उपतहसीलों में बतौर सहायक चुनाव अधिकारी का काम देख रहे थे। खास बात यह है कि ये अधिकारी लंबे समय से अपने गृह जिले या एक ही स्थान पर तैनात हैं। ऐसे में आयोग के आदेशों की अवहेलना की बात सामने आ रही है।
यही वजह है कि एक सप्ताह से इनके तबादलों की मंजूरी नहीं आ सकी है। सूत्रों का कहना है कि आयोग इस बात से बेहद नाराज है कि अगर पहले सभी के तबादले नहीं किए थे तो आयोग को सरकार की ओर से प्रमाण पत्र क्यों भेजे गए? अब आयोग ने अगर इस मामले में कार्रवाई की तो इसकी गाज मंडल से लेकर शासन तक के अधिकारियों पर गिर सकती है।