हिमाचल की सियासत के दो अनुभवी दिग्गज वीरभद्र और सुखराम बेशक लोकसभा चुनावों से पहले गले लग एकजुटता की तस्वीर पेश कर चुके हों। लेकिन बरसों पुरानी टीस अभी भी सार्वजनिक मंच पर नजर आ ही जाती है। कांग्रेस की पारंपरिक मंडी संसदीय में कभी एक दूसरे के विरोधी रहे दोनों वरिष्ठ नेताओं का एक साथ प्रचार भाजपाइयों के लिए नींद उड़ाने वाला माना जा रहा है।
वहीं मंगलवार को कांग्रेस की न्याय रैली में साथ साथ सीट होने के बावजूद दोनों नेताओं का करीब डेढ़ घंटे तक न बात करना, न हाथ मिलाना कांग्रेस समर्थकों के लिए परेशानी भरा रहा। दोपहर करीब 12 बजे तक राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी के आने या ना आने की तस्वीर साफ नहीं थी। इसी बीच नेताओं ने अलग अलग से एंट्री मारी। 11:55 बजे पंडित सुखराम मंच पर पहुंचे। इसके बाद वीरभद्र सिंह 12 बजे मंच पर आए। वीरभद्र सिंह और सुखराम को साथ साथ बैठाया गया। लेकिन दोनों में से किसी ने भी एक-दूसरे की ओर नहीं देखा, न ही हाथ मिलाया।