सीएम ने कहा कि काफी राज हमारे सीने में भी हैं, जो आप बोलते रहे हम सुनते रहे। अब ऐसा नहीं चलेगा। तंज कसते हुए कहा ‘मैंने कहीं कहा कि मेरा एक मंत्री गायब है, पता नहीं कहां है, जनता बोली - घास काट रहा है।’ सीएम बोले कि हमने अनिल को धर्म संकट में नहीं डाला, अनिल खुद धर्म संकट में हैं व हल भी खुद निकालें। परिवार से बड़ा राष्ट्रवाद है।
रामस्वरूप की पैरवी करने से सुखराम ने किया था मना
सीएम ने कहा कि दिल्ली में पंडित सुखराम अपने पोते आश्रय के साथ मेरे पास आए। मुझसे कहने लगे की लड़ाई अधूरी है और आपको टीम बढ़ानी चाहिए। साथ ही दोनों ने रामस्वरूप के लिए टिकट की पैरवी करने से मना किया। यह भी कहने लगे कि आपको मजबूत प्रत्याशी दिया जाएगा। फिर जब आश्रय शर्मा के लिए टिकट मांगा तो वे हैरान रह गए। उनसे दो टूक कहा कि टिकट का फैसला पार्टी का नेतृत्व करता है।
मुख्यमंत्री ने अनिल शर्मा को फिर से भाजपा के लिए प्रचार करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि भाजपा के सदस्य होने के चलते अपना नैतिक दायित्व निभाएं। लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए कार्य करें। उन्होंने कहा कि पंडित सुखराम एक वरिष्ठ नेता हैं।
यह समझ लेना चाहिए कि अब उनका दौर गुजर चुका है। सुखराम कहते हैं कि विधानसभा चुनाव में उनके कारण ही मंडी से भाजपा को ऐतिहासिक जीत प्राप्त हुई, लेकिन उनका भ्रम इस लोकसभा चुनाव में टूट जाएगा।