20 अप्रैल, 2017 : यात्रियों से भरी उत्तराखंड की ओवरलोड निजी बस शिमला के गुम्मा के निकट खाई में गिरी, 45 की मौत।
5 नवंबर, 2016 : मंडी के बिंद्रावणी में ब्यास में गिरी बस, 17 की मौत और 26 घायल।
20 मई, 2016 : चंबा में बस हादसे में 14 मरे, 31 घायल।
23 जुलाई, 2015 : कुल्लू में पार्वती नदी में गिरी बस, 31 लोग बहे।
21 अगस्त, 2014 : किन्नौर के रुतरंग में बास्पा नदी में गिरी बस 23 की मौत, 20 घायल।
27 सितंबर, 2013 : रेणुका में ददाहू-टिक्कर संपर्क मार्ग पर निजी बस गहरी खाई में गिरी। बस सवार सभी 21 लोगों की मौत।
8 मई, 2013 : मंडी के झीड़ी में जोगणी माता मंदिर के पास ब्यास नदी में समाई बस, 40 मरे।
11 अगस्त, 2012 : चंबा-धुलाड़ा मार्ग पर गागला के पास ओवरलोड बस हादसा, 52 मरे।
14 महीने की जयराम सरकार सड़कों की हालत नहीं समझ सकी है। प्रदेश की जनता को सपने दिखाती रही है। हिमाचल के नेशनल हाईवे और अन्य ग्रामीण सड़कों की हालत खराब है। जयराम सरकार सड़कों की मरम्मत करने में फेल रही है, जबकि सरकार ने आठ हजार करोड़ के ऋण लिए हैं। सड़क हादसे दुखद हैं। कांग्रेस इनको लेकर गंभीर रही है। - नरेश चौहान, महासचिव, प्रदेश कांग्रेस कमेटी
हादसे दुखद हैं। जयराम सरकार की प्राथमिकता ही सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य हैं। जयराम सरकार भी सड़क हादसों पर बहुत गंभीर है। भाजपा ने 69 हाईवे हिमाचल के लिए स्वीकृत करवाए हैं। इसका एक मकसद सुरक्षित परिवहन भी है। इनमें से 14 का शिलान्यास भी हो गए हैं। कांग्रेस ने घोषणापत्र में बोला था कि 2000 किलोमीटर नई सड़कें हर साल बनाएंगे, मगर सड़कों का रखरखाव तक नहीं किया। - प्रवीण शर्मा, प्रदेश मीडिया प्रभारी, भाजपा