सवाल : पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को लेकर भाजपा डिफेंसिव मोड में क्यों है?
सत्ती : वीरभद्र सिंह की उम्र का लिहाज करते हुए पार्टी उनके खिलाफ ज्यादा पलटवार नहीं कर रही है। जहां जरूरत होती है, वीरभद्र सिंह के आरोपों का जवाब दिया भी जा रहा है। ममता बनर्जी की तरह भाजपा पत्थर नहीं मार सकती। पांच साल के दौरान केंद्र सरकार के कार्यों के नाम पर भाजपा वोट मांग रही है। आरोप-प्रत्यारोप की भाजपा राजनीति नहीं करती है।
सवाल : असंतुष्ट नेताओं के भितरघात को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
सत्ती : सबकी इच्छाओं की पूर्ति करना मुश्किल होता है। इस कारण कई बार मतभेद हो जाते हैं। बावजूद इसके पार्टी ने सभी को एकजुट रखते हुए चुनाव प्रचार किया है। पार्टी में कोई भी असंतुष्ट नहीं है न ही किसी तरह के भितरघात का खतरा है। अगर कहीं से भितरघात की सूचना प्राप्त हुई तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सवाल : विधानसभा चुनाव में सुखराम साथ थे, अब खिलाफ हैं। इसकी भरपाई कैसे करेंगे?
सत्ती : विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली जीत का श्रेय सुखराम परिवार को नहीं जाता है। भाजपा के प्रत्याशियों ने सीटें जीतीं। अब सुखराम परिवार के कांग्रेस में जाने से भाजपा को कोई नुकसान भी नहीं हुआ है।
मोदी और जयराम के काम के आधार पर लोग वोट देंगे। पंडित सुखराम ने मंडी के लिए आजतक कोई काम नहीं किया। इसी तरह धनीराम शांडिल भी सांसद और मंत्री रहते कोई काम नहीं कर सके।