विश्व प्रसिद्ध कुल्लू-मनाली के पर्यटन पर लॉकडाउन-4 ने पानी फेर दिया है। घाटी के पर्यटन कारोबारियों को होटल खोलने की उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने पर्यटन गतिविधियों को फिलहाल शुरू नहीं करने की अनुमति नहीं दी। मई में पर्यटन कारोबार ठप होने से करीब 500 करोड़ का नुकसान हुआ है।
मई में रोहतांग, सोलंगनाला, फातरू, गुलाबा, कोठी, मढ़ी, पार्वती घाटी के मणिकर्ण, कसोल, खीरगंगा, तीर्थन वैली, सोझा व जलोड़ी दर्रा सहित दो दर्जन पर्यटन स्थलों में रौनक रहती है। सैलानियों से गुलजार रहने वाली घाटी की वादियों में दो माह से सन्नाटा है। जिले में करीब 2500 होटल व होम स्टे हैं। करीब चार हजार टैक्सी ऑपरेटर तथा 700 से अधिक साहसिक पर्यटन से जुड़ी रिवर राफ्टिंग व पैराग्लाइडिंग शामिल हैं।
विदेशी सैलानियों की चहलकदमी के प्रसिद्ध कसोल समेत धार्मिक पर्यटक मणिकर्ण, खीरगंगा, हिडिंबा माता, सरयोलसर में भी सन्नाटा है। होटल एसोसिएशन मनाली के अध्यक्ष अनूप राम ठाकुर ने कहा कि मई में जिले में पर्यटन को 500 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है।
जब तक कोरोना खत्म नहीं हो जाता है, तब तक कुल्लू-मनाली का पर्यटन शुरू नहीं किया जा सकता। केंद्र सरकार ने 20 लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज जारी किया, लेकिन हैरानी है कि इसमें पर्यटन उद्योग का कोई भी जिक्र नहीं किया गया है।
लॉकडाउन से इनको हुआ नुकसान
पर्यटन के विख्यात कुल्लू-मनाली में होटल के साथ टैक्सी यूनियन, वोल्वो बस, साहसिक पर्यटन, सूट-बूट यूनियन आदि गतिविधियों में करीब प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 20 हजार लोग जुड़े हैं। इनका न केवल रोजगार छिन गया बल्कि भविष्य की भी चिंता सताने लगी है।