केंद्रीय तिब्बत प्रशासन के प्रमुख एवं राष्ट्रपति डॉ. लोबसांग सांग्ये
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केंद्रीय तिब्बत प्रशासन के प्रमुख एवं राष्ट्रपति डॉ. लोबसांग सांग्ये ने कहा कि वैश्विक शक्ति अमेरिका सरकार से निर्वासित तिब्बत सरकार को मान्यता मिलना बड़ी उपलब्धि है। पूरे विश्व के लिए चीन की विस्तारवादी नीति हमेशा ही खतरा रही है। तिब्बत समेत कई देशों के खनिज संपदा वाले क्षेत्रों पर चीन की नजर रहती है। समय पर कोविड-19 की जानकारी नहीं देकर चीन ने विश्व को महामारी में झोंक दिया।
भारत की उत्तराखंड आपदा के पीछे भी चीन की कुटिल चाल से इंकार नहीं किया जा सकता है। वीरवार को पांवटा साहिब के भूपपुर में पत्रकारों को संबोधित करते हुए डॉ. सांग्ये ने कहा कि पहली बार औपचारिक रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति भवन व्हाइट हाउस ने मान्यता दी है। तिब्बती सरकार के किसी नेता का छह दशक में इस तरह का यह पहला ऐतिहासिक दौरा रहा था।
अमेरिकी सरकार की ओर से तिब्बती सरकार के निर्वासन को मान्यता नहीं देने के कारण पिछले छह दशकों से सीटीए प्रमुख को अमेरिका में एंट्री नहीं मिलती थी। अमेरिकी संसद ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर तिब्बत की वास्तविक स्वायत्तता और 14वें दलाईलामा की ओर से वैश्विक शांति, सौहार्द और तालमेल के महत्व के लिए किए जा रहे कार्यों को मान्यता दी है।
कहा कि जानबूझ कर चीन ने 3 से 5 सप्ताह तक विश्व को कोविड-19 की जानकारी नहीं दी। आज पूरे विश्व में महामारी से लाखों लोग जान गंवा चुके हैं। उत्तराखंड के चमोली में आपदा के पीछे चीन का हाथ होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। चीन अपनी नदियों पर 3 डैम बना चुका है। विस्तारवादी नीतियों को अंजाम देने के लिए कभी भी नुकसान पहुंचा सकता है।
बुधवार रात को तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रमुख डॉ. लोबसांग सांग्ये पांवटा पहुंचे। भूपपुर तिब्बत सेटलमेंट इकाई ने भव्य स्वागत किया। भूपपुर कॉलोनी में उन्होंने ओपन जिम का भी शुभारंभ किया। कहा कि मानवाधिकार उल्लंघन व चीन के हर अत्याचार के खिलाफ भारतवासियों का सदैव साथ रहा है। हिमाचल के लोगों से तो परिवार की तरह प्यार मिलता रहा है। इस प्यार के लिए तिब्बती समुदाय शुक्रजुगार रहेगा।