उन्होंने अध्यापक राज कुमार पर बच्चियों के साथ गलत काम करने के आरोप की शिकायत दी। तफ्तीश में आरोप सिद्ध हो गए। इसके तुरंत बाद एसएमसी प्रधान की निगरानी में आठों बच्चियों के बयान रिकॉर्ड किए गए।
उस दौरान पाया गया कि सीएचटी सरदार सिंह को मामले की पूरी जानकारी थी। लेकिन, उसने विभागीय अधिकारियों को सूचित नहीं किया गया। पुलिस ने जांच पूरी कर चालान कोर्ट में पेश कर दिया।
अभियोजन पक्ष ने सुबूतों और दलीलों से आरोपियों पर दोष साबित कर दिया। बुधवार को अदालत ने आरोपी अध्यापक को आईपीसी की धारा 354(ए) के तहत तीन वर्ष की कैद और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
जुर्माना अदा न करने की सूरत में तीन माह अतिरिक्त कारावास, आईपीसी की धारा 376(2)(एफ) के तहत उम्र कैद और 50 हजार रुपये जुर्माना व जुर्माना अदा न करने पर एक वर्ष की कैद, आईपीसी की धारा 506 के तहत सात वर्ष कैद, 25 हजार जुर्माना और जुर्माना अदा न करने पर छह माह कैद, पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत उम्र कैद व 50 हजार जुर्माना व जुर्माना न अदा करने पर एक वर्ष कैद, पॉक्सो एक्ट की धारा 12 के तहत तीन वर्ष कैद, 20 हजार जुर्माना व जुर्माना अदा न करने पर तीन माह की कैद की सजा सुनाई।
वहीं, सीएचटी सरदार सिंह को 202 आईपीसी के तहत छह माह कैद व 5 हजार जुर्माना व जुर्माना अदा न करने पर तीन माह की कैद और पॉक्सो एक्ट की धारा 21(2) के तहत एक वर्ष कैद व दस हजार रुपये जुर्माना व जुर्माना अदा न करने पर तीन माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई।