सदन में मुख्यमंत्री ने गलत तथ्य पेश किए। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल के इतिहास में यह पहले मुख्यमंत्री हैं, जो कभी सच नहीं बोलते। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने केवल मुख्यमंत्री के राजनीतिक भाषण का विरोध किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश को आरडीजी मिले, इसके लिए सरकार अपने स्तर पर प्रयास करे और भाजपा भी अपने स्तर पर प्रयास करेगी। जयराम ने दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के समय दो वित्त आयोगों से 18 हजार करोड़ मिले, जबकि मोदी सरकार में दो वित्त आयोगों से 89 हजार 254 करोड़ रुपये की आरडीजी मिली। यूपीए सरकार में हिमाचल के साथ अन्याय हुआ।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने सदन में 35,482 करोड़ रुपये ऋण लेने और 27 हजार करोड़ चुकाने की बात कही, जबकि एक दिन पहले 23 हजार करोड़ ऋण लेने और 26 हजार करोड़ चुकाने का बयान दिया था। इन्हीं विरोधाभासी तथ्यों पर विपक्ष ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि 30 वर्षों में प्रदेश पर 69,600 करोड़ का ऋण था, जबकि वर्तमान सरकार ने 40 हजार करोड़ से अधिक कर्ज लिया। भाजपा सरकार ने 95 प्रतिशत ऋण चुकाया, जबकि वर्तमान सरकार ने केवल 60 प्रतिशत चुकाया। आरडीजी केवल बहाना है, कांग्रेस अपनी राजनीति बचाने का रास्ता खोज रही है, जबकि केंद्र ने विभिन्न मदों में करीब सवा दो लाख करोड़ रुपये की सहायता दी है। उन्होंने कहा कि वास्तविक मुद्दा यह नहीं है कि केंद्रीय बजट में रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट का उल्लेख हुआ या नहीं, बल्कि असली प्रश्न यह है कि जब यह ग्रांट हिमाचल प्रदेश को मिल रही थी तब भी राज्य सरकार वित्तीय संकट का रोना रो रही थी।
सुक्खू सरकार शासन चलाने के बजाय प्रदर्शन में व्यस्त : बिंदल
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा है कि प्रदेश की सुक्खू सरकार शासन चलाने के बजाय धरना-प्रदर्शन की राजनीति में व्यस्त है। यह स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए असामान्य और चिंताजनक है। डॉ. राजीव बिंदल वीरवार को भाजपा जिला कार्यालय नाहन में पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर मुख्यमंत्री और उनके मंत्री धरनों में बैठे। सरकार का दायित्व समस्याओं का समाधान करना होता है, न कि विरोध प्रदर्शन। जब सरकार ही धरने देने लगे, तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने कहा कि हाल ही में सत्तारूढ़ दल के विधायक और मंत्री तख्तियां लेकर सदन से बाहर निकल आए और नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए, जबकि लोकतंत्र में विरोध और धरना देना विपक्ष की जिम्मेदारी होती है। हिमाचल में सत्ता पक्ष ही विपक्ष की भूमिका निभा रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
राज्य की जनता सड़क, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास जैसे मूलभूत मुद्दों पर सरकार से ठोस कार्रवाई की अपेक्षा कर रही है, लेकिन सरकार इन विषयों से ध्यान हटाकर केवल राजनीतिक नारों और विरोध प्रदर्शन में समय बिता रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी चुनावी गारंटियों को पूरा करने में विफल रही है। अब अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए राजनीतिक माहौल बनाने का प्रयास कर रही है। इस अवसर पर सांसद सुरेश कश्यप और भाजपा हिमाचल प्रभारी श्रीकांत शर्मा मौजूद रहे। संवाद