हिमाचल सरकार के उद्यान विभाग ने शुक्रवार को सेब बागवानों को सलाह दी कि हड़ताल के चलते वे फसल के तुड़ान में जल्दबाजी न करें। हालात सामान्य होने की प्रतीक्षा करें। बता दें कि सेब, नाशपाती ही नहीं अन्य सब्जियां भी अब खराब होने के कगार पर हैं।
बद्दी में शुक्रवार को विभिन्न उद्योग संगठनों बीबीएनआईए, लघु उद्योग भारती, दवा निर्माता उद्योग संघ, हिप्र गत्ता उद्योग संघ, ग्राम शिल्प उद्यमी प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों ने प्रेस वार्ता में कहा कि आठ दिन से हिमाचल में उद्योग ठप पड़े हैं।
बीबीएन में अब तक 3000 करोड़ का नुकसान हो चुका है। यदि हड़ताल न खुली तो उद्योग-धंधे सिमट जाएंगे। विशेषकर लघु उद्योग बैंकों के ब्याज और वेतन के खर्चों से उठ नहीं पाएंगे।
बीबीएनआईए एमएसएमई कमेटी के चेयरमैन मुकेश जैन ने कहा कि कामगारों को पूरा वेतन देना पड़ रहा है, जबकि उद्योग में कोई भी काम नहीं हो रहा है।
हिमाचल गत्ता उद्योग संघ के प्रदेश सचिव बलदेव गोयल, अजय चौधरी व रजत साहू ने कहा कि सीजन के लिए लाखों सेब पेटियां बना रखी हैं। ये पेटियां शिमला नहीं पहुंच पा रही हैं।
लघु उद्योग भारती के प्रांत वरिष्ठ उपाध्यक्ष नेत्रप्रकाश कौशिक ने कहा कि हड़ताल से सूक्ष्म एवं छोटे उद्योग टूट गए हैं। हजारों टन तैयार माल बरसात में सड़ रहा है।
प्रदेश फल, सब्जी एवं फूल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान के अनुसार नाशपाती की फसल खराब होने की आशंका है। बागवानों ने सेब तुड़ान रोक दिया है। तुड़ान ज्यादा दिन नहीं रोक सकते।
मंडियों में सेब बेचने में परेशानी हो रही है। प्रदेश से चालीस हजार सेब पेटियां रोजाना देश की मंडियों में भेजी जाती रही हैं। ट्रकों की हड़ताल ने सेब ढुलाई की रफ्तार रोक दी है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सरकार को पत्र भेजकर ट्रकों की हड़ताल रोकने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि सरकार सेब फसल को तबाह होने से बचाए।
पूर्व विधायक रोहित ठाकुर और जुब्बल कोटखाई ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष मोती लाल डेरटा ने कहा कि बागवानों को फसल मंडियों तक पहुंचाने में परेशानी हो रही है।