फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

IIT छात्रों का कमाल: भूस्खलन, भूकंप से पहले ही मिल जाएगा खतरे का सिग्नल

Mon, 26 Mar 2018 01:15 PM IST
कमलेश रतन भारद्वाज, अमर उजाला, मंडी
विज्ञापन
विज्ञापन

पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और भूकंप से अब मासूम लोगों की जानें नहीं जाएंगी। आईआईटी मंडी के प्रशिक्षु इंजीनियरों ने दोनों आपदाओं से समय रहते सचेत करने वाला उपकरण तैयार किया है। घुमावदार सड़कों पर वाहनों की आवाजाही के समय यदि भूस्खलन होता है, तो दूर से ही लाल बत्ती और हूटर बजना शुरू हो जाएगा।

विज्ञापन


खतरा आने से पहले ही आप सावधान हो जाएंगे। भूस्खलन वाली साइट से 100 से 200 मीटर पहले ही आपको खतरे का सिग्नल मिल जाएगा। प्रशिक्षु इंजीनियरों ने इस लाल बत्ती को लैंडस्लाइड रेड लाइट एंड हूटर अलर्ट सिस्टम नाम दिया है। 16,500 रुपये की लागत से तैयार यह उपकरण हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों की सड़कों पर कारगर साबित हो सकता है।

मंडी-बजौरा वाया कटौला राजमार्ग पर भूस्खलन संवेदनशील क्षेत्र गढ़पा पहाड़ी के समीप इस उपकरण को आईआईटी के इंजीनियरों ने स्थापित किया है। उपकरण के परिणाम सफल रहे हैं। आईआईटी प्रबंधन ने अब इस उपकरण को पेटेंट कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

विज्ञापन

पांच सेंसर, एक्सलरोमीटर से जलेगी बत्ती

आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ कंप्यूटिक एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के सहायक प्रोफेसर वरुण दत्त ने बताया कि इस सिस्टम को भूस्खलन संवेदनशील इलाकों में लगाया जाएगा। इसमें पांच सेंसर नोड स्थापित किए गए हैं।

उपकरण में एक्सलरोमीटर सेंसर रफ्तार, फोर्स सेंसर गीली मिट्टी के भार, नमी मापने के लिए एक मॉयस्चर सेंसर लगाया गया है। प्रत्येक सेंसर नोड में मिट्टी की चाल, नमी तथा मिट्टी पर लगने वाले बल को रिकार्ड किया जाता है।

एक्सलरोमीटर जमीन में कंपन होते ही लाल बत्ती को जला देगा और हूटर स्वत: बज उठेगा। 

रक्षा अनुसंधान संगठन से भी प्रोजेक्ट को मिला सहयोग

वर्तमान में आईआईटी मंडी के विद्यार्थी शुभम अग्रवाल, प्रवीण कुमार, गणेश गुप्ता, अंकुश पठानिया, नरेश माली, कपिल अग्रवाल, प्रतीक चतुर्वेदी, प्रोफेसर डॉ. वरुण दत्त और डॉ. उदय के नेतृत्व में इस उपकरण को और बेहतर बनाने में जुटे हैं।

इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने में हिमाचल प्रदेश राज्य विज्ञान, तकनीकी एवं पर्यावरण परिषद (डीटीआरएल), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) का भी सहयोग रहा है। 
विज्ञापन

मेक इन इंडिया योजना से तैयार होंगे उपकरण

उपकरण पेटेंट होने पर केंद्र और प्रदेश सरकार के सहयोग से आईआईटी मंडी के मेक इन इंडिया योजना के तहत चल रहे कैटलिस्ट इंक्यूबेटर में उपकरण तैयार होंगे।

यह उत्पाद किस्तों पर महज 1000 रुपये मासिक पर भी लिया जा सकेगा। उपकरण को ईजाद करने वाले विद्यार्थी एक कंपनी बनाकर इस उत्पाद को बड़े स्तर पर तैयार करेंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें