जमीन की मुसाबी से लट्ठा तैयार करने की जटिल प्रक्रिया को जिला प्रशासन ने आसान कर दिया है। जिला शिमला में लट्ठा अब आधुनिकतम डिजिटल प्रक्रिया से तैयार किया जा रहा है। इस तकनीक से मुसाबी से लट्ठा तैयार करने में महज 10 घंटे लगते हैं।
इससे पहले इस प्रक्रिया को पूरा करने में कम से कम 40 दिन लग जाते थे। विकास कार्यों के लिए राजस्व प्रक्रिया के अनुपालन में मुसाबी यानि गांव के मानचित्र की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मुसाबी राजस्व विभाग की बंदोबस्त शाखा द्वारा बंदोबस्त के दौरान तैयार की जाती है।
यह 30 से 50 सालों बाद दोबारा बनाई जाती है। जिले में 3325 राजस्व गांव हैं। इन सभी राजस्व गांवों में मुसाबी से लट्ठे की प्रतिलिपियां तैयार करने में कई साल लग सकते हैं। प्रचलित तरीके से मुसाबी से लट्ठा (विलेज मैप) की प्रतिलिपि तैयार करने में करीब 40 दिन का वक्त लगता है। इस प्रक्रिया से राहत मिलेगी।
खराब नहीं होगा राजस्व रिकार्ड
अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी शिमला नीरज कुमार ने बताया कि इस तकनीक से बनाया लट्ठा न केवल समय से तैयार होता है बल्कि इसकी गुणवत्ता भी निर्धारित मापदंडों के अनुसार होती है। इस प्रक्रिया से प्रशासन को लोगों को समयबद्ध सेवाएं प्रदान करने में मदद मिलेगी।
डिजिटल मुसाबी तकनीक से खराब हो चुके लट्ठों के डिजिटल प्रिंट लोगों को मिल सकेंगे। राजस्व रिकार्ड को व्यवस्थित करने में भी मदद मिलेगी।
जल्द होगा भुगतान
एमसी आयुक्त अमरजीत सिंह ने बताया है कि सभी सेवानिवृत्त कर्मियों को दीवाली से पहले 25 प्रतिशत राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। चरणजीत सिंह को काफी भुगतान कर दिया है। शेष जल्द देंगे।