11 बजे समारोह के पहले सत्र का शुभारंभ वरिष्ठ साहित्यकार गौतम शर्मा व्यथित के वक्तव्य के साथ हुआ। उन्होंने पहाड़ी गांधी बाबा कांशीराम के व्यक्तित्व और कृतित्व के कई अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला। शाहपुर के गायक विक्रांत ने बाबा के लिखे और गाये क्रांति गीतों का गायन कर समां बांधा। किया। कविता पाठ में अदिति गुलेरी, सुमित राज, कल्पना गांगटा, मुनीष तन्हा, उमा ठाकुर, कुलदीप शर्मा, प्रतिभा शर्मा, दीपक कुल्लुवी, रविता चौहान और दीपक भारद्वाज ने कविता पाठ किया।
समारोह का दूसरा सत्र दोपहर बाद चार बजे शुरू हुआ। इस सत्र में आशा पठानिया, राजीव त्रिगर्ती, किरण गुलेरिया, मदन हिमाचली, राधिका गुलेरी भारद्वाज, अशोक दर्द, इंदु नवनीत भारद्वाज, अशोक कालिया, अर्चना शर्मा, डाक्टर अजय पाठक, कुमुद, दीनदयाल शर्मा, हरिप्रिया और नीतू वर्मा की कविताएं शामिल रहीं। कार्यक्रम के तीसरे व और आखिरी सत्र की शुरूआत पूनम शर्मा और उनके शिष्यों की ओर से प्रस्तुत सरस्वती वंदना के साथ हुई।